महिला नेतृत्व और रचनात्मकता से बदल रहा विश्व: लिथुआनियाई राजदूत | The Voice TV

Quote :

"छोटा सा बदलाव ही जिंदगी की एक बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है"।

National

महिला नेतृत्व और रचनात्मकता से बदल रहा विश्व: लिथुआनियाई राजदूत

Date : 13-Mar-2026

 नई दिल्ली, 13 मार्च । भारत में लिथुआनिया गणराज्य की राजदूत डायना मिकेविचेने ने कहा कि आज के वैश्विक समाज के विकास में महिलाओं का नेतृत्व और उनकी रचनात्मकता सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरे हैं। डायना मिकेविचेने ने यह बात गुरुवार को नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के 'नारी संवाद प्रकल्प' की ओर से आयोजित 'शक्ति पर्व 2026' के भव्य आयोजन में कही। यह कार्यक्रम महिलाओं की उपलब्धियों और समाज में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को समर्पित रहा।

मुख्य अतिथि के रूप में डायना मिकेविकीने ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करता है। आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि आईजीएनसीए का नारी संवाद प्रकल्प भारतीय परंपरा में निहित स्त्री शक्ति के विभिन्न आयामों को सामने लाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। भारतीय संस्कृति में नारी को सृजन ज्ञान और शक्ति के रूप में देखा गया है और ऐसे आयोजन इस परंपरा को समकालीन संदर्भों से जोड़ते हैं।

इस आयोजन में साहित्य से लेकर संगीत तक के विभिन्न सत्रों को शामिल किया गया है। काव्य गोष्ठी में दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू की प्रख्यात विदुषियां जैसे प्रो. मीरा द्विवेदी, डॉ. ममता त्रिपाठी, डॉ. अंशु जोशी और डॉ. सोनी पांडेय अपनी कविताओं के माध्यम से नारी शक्ति पर चर्चा की।



पैनल चर्चा में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली सबसे उम्रदराज भारतीय महिला ज्योति रात्रे, वैदिक पुरोहित आचार्य श्रुति शास्त्री, कमर्शियल पायलट कैप्टन दिशा भोरिया और कैब ड्राइवर बबली जैसे प्रेरणादायक व्यक्तित्व ने अपने अनुभव साझा किए।।

दोपहर के सत्र में पखावज तबला और हारमोनियम की 'जुगलबंदी' के साथ-साथ डॉ. जया तिवारी के नेतृत्व में एक बैंड परफॉर्मेंस का आयोजन किया गया जिसमें भारतीय शास्त्रीय और आधुनिक संगीत का संगम की प्रस्तुति दी गई।

'शक्ति पर्व' का मुख्य उद्देश्य कला, शिक्षा और साहस के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को एक मंच प्रदान करना है। कार्यक्रम का सूत्रवाक्य "माता भूमि: पुत्रो अहं पृथिव्या:" (यह भूमि मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूं) नारी शक्ति और प्रकृति के गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।

इस मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव लिली पांडेय सहित विद्वानों, कलाकारों, शोधार्थियों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload









Advertisement