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पंडित धीरेन्द्र शास्त्री बोले- बड़े घर की माताएं भी पी रहीं शराब, कांग्रेस ने घेरा

Date : 30-Apr-2026

 भोपाल, 29 अप्रैल  मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक और बयान विवादों में आ गया है। नागपुर में कथा के दौरान उन्होंने कहा कि आजकल पुरुषों की तो छोड़ो, हमने सुना कि बड़े घरानों की माताएं भी पी रही हैं। राम-राम, राम-राम…बजरंग बली बचाएं।'

बुधवार को पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के इस बयान से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसके बाद सामाजिक और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। उनके इस बयान पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। छतरपुर में कांग्रेस नेता दीप्ति पांडे ने कहा कि व्यासपीठ से इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। पूरा देश उन्हें सुनता है, ऐसे में माताओं के लिए इस तरह के शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

दरअसल, कथावाचक पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने नागपुर में चल रही कथा के दौरान 28 अप्रैल को व्यासपीठ से कहा था- जब कई माताएं ही विचित्र संस्कारों वाली हो जाएंगी तो बच्चों को क्या हलुआ संस्कार देंगी? हम तो सोच रहे हैं कि जिनकी घरवालियां पीती हैं, उनके कल के दिन बच्चे होंगे, वे बच्चे रोएंगे तो उन्हें भी शराब पिलाकर सुला देंगी। उन्होंने कहा कि पहले मर्यादा होती थी, संस्कार होते थे। लोग कुछ गलत करने से डरते थे लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं।

इस बयान पर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सदस्य दीप्ति पांडे ने कहा कि सृष्टि की सृजनकर्ता एक नारी ही होती है। वो मां है, जो बच्चे की प्रथम गुरु है। मातृ शक्ति के लिए इस तरह की भाषा का उपयोग करने का मैं विरोध करती हूं। उन्होंने बुधवार को वीडियो जारी कर कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी, मैं आपसे निवेदन करती हूं कि मातृ शक्ति के खिलाफ इस तरह की भाषा का उपयोग करना बंद कर दें। आपने महिलाओं के खिलाफ अब कोई अनर्गल टिप्पणी की तो हमें आपके खिलाफ सड़कों पर उतरना पड़ेगा।

यह पहला मौका नहीं है जब शास्त्री के बयान चर्चा में आए हों। इससे पहले भी नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने चार बच्चे पैदा करने और उनमें से एक को देश सेवा के लिए समर्पित करने की बात कही थी, जिस पर देशभर में विवाद हुआ था। धार्मिक मंच से दिए गए इस बयान ने एक बार फिर समाज और राजनीति के बीच बहस को तेज कर दिया है। जहां समर्थक इसे सामाजिक चेतावनी बता रहे हैं, वहीं विरोधी इसे महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बता रहे हैं।


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