नई दिल्ली, 29 अप्रैल। देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में तेजी से सुधार हुआ है और लोगों के पॉकेट पर इलाज के खर्च का दवाब भी कम हुआ है। बुधवार को जारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के 80वें दौर के सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच पहले के मुकाबले काफी बेहतर हुई है और इलाज का खर्च भी कम हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में मरीजों का खर्च काफी कम हो गया है। आधे से ज्यादा भर्ती मामलों में मरीजों को औसतन सिर्फ 1100 रुपये ही अपनी जेब से खर्च करना पड़ा। वहीं, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में बाह्य रोगी (ओपीडी) सेवाएं कई जगह पूरी तरह मुफ्त मिल रही हैं, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिली है।
सर्वे में यह भी सामने आया है कि अब लोग पहले की तुलना में ज्यादा इलाज के लिए आगे आ रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में बीमार होने की रिपोर्ट करने वाले लोगों का प्रतिशत 6.8 से बढ़कर 12.2 प्रतिशत हो गया है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 9.1 प्रतिशत से बढ़कर 14.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
ग्रामीण भारत में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का इस्तेमाल भी बढ़ा है। ओपीडी सेवाओं के लिए सरकारी अस्पतालों का उपयोग 2014 के 28 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 35 प्रतिशत हो गया है।
इसके अलावा, सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का दायरा भी तेजी से बढ़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कवरेज 12.9 प्रतिशत से बढ़कर 45.5 प्रतिशत हो गया है, जबकि शहरी इलाकों में यह 8.9 प्रतिशत से बढ़कर 31.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि गरीब वर्गों पर इलाज का खर्च कम हुआ है, जिससे यह साफ है कि सरकारी योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर दिख रहा है।
मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़ी प्रगति दर्ज की गई है। संस्थागत प्रसव अब ग्रामीण क्षेत्रों में 95.6 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 97.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
