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आईआईटी खड़गपुर में स्पिक मैके सम्मेलन, शास्त्रीय संगीत संस्कृति और साधना से जुड़ रहे युवा

Date : 26-May-2026

 खड़गपुर, 26 मई। स्पिक मैके के 11वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ सोमवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर में हुआ। सात दिवसीय इस सम्मेलन में देश-विदेश से आए डेढ़ हज़ार से अधिक प्रतिनिधि भारतीय शास्त्रीय, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अनुभव करेंगे।

उद्घाटन दिवस पर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता रजित कपूर के साथ एक प्रेरक संवाद सत्र आयोजित किया गया। चर्चित फिल्म ‘द मेकिंग ऑफ द महात्मा’ के प्रदर्शन के बाद उन्होंने आत्म-जागरूकता, जिम्मेदारी और व्यक्तित्व निर्माण पर अपने विचार साझा किए।

प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए रजित कपूर ने कहा कि केवल आलोचना के लिए आलोचना करने के बजाय स्वयं वह परिवर्तन बनिए, जो आप समाज में देखना चाहते हैं।

उन्होंने युवाओं से अपने सुविधाजनक दायरे से बाहर निकलकर नई राहें तलाशने का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी पहचान बनाने के लिए दुनिया में कदम बढ़ाइए और अपने विचारों को हर दिशा में खुला रखिए।

सम्मेलन का उद्घाटन सुबह आईआईटी खड़गपुर के प्लैटिनम जयंती समारोह के अंतर्गत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। स्पिक मैके के संस्थापक डॉ. किरण सेठ ने प्रतिनिधियों से परिसर को ‘आश्रम’ और ‘गुरुकुल’ की भावना के साथ अनुभव करने की अपील की। वक्ताओं ने पूरे सत्र के दौरान समयबद्धता, अनुशासन, सजगता और सांस्कृतिक वातावरण में पूर्ण रूप से सहभागी बनने के महत्व पर जोर दिया।

दोपहर के सत्र में वरिष्ठ स्पिक मैके सदस्यों के नेतृत्व में प्रतिनिधियों एवं शिक्षकों के लिए अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्पिक मैके की राष्ट्रीय महासचिव मीनू शंकर ने सम्मेलन की कार्यप्रणाली और दर्शन पर प्रकाश डालते हुए ब्रह्म मुहूर्त में योग और ध्यान साधना से दिन की शुरुआत करने के महत्व को रेखांकित किया।

स्पिक मैके के अध्यक्ष राधामोहन तिवारी ने संस्कृत के प्रसिद्ध श्लोक—“काक चेष्टा, बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च।अल्पाहारी, गृह त्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणम्॥”

श्लोक का उल्लेख करते हुए छात्रों के लिए समर्पण, सतर्कता, सादगी, एकाग्रता और त्याग को आवश्यक गुण बताया।

इस अवसर पर यह भी घोषणा की गई कि स्पिक मैके की स्वर्ण जयंती के मौके पर 12वां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जो इस सांस्कृतिक आंदोलन की जन्मस्थली है।

सोमवार देर शाम के मुख्य सत्र में आईआईटी खड़गपुर की कार्यवाहक निदेशक प्रो. रिंतु बनर्जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। इससे पहले पद्मश्री सम्मानित कलाकार शेशम्पट्टी टी. शिवलिंगम ने नादस्वरम वादन की आध्यात्मिक प्रस्तुति देकर दक्षिण भारतीय शास्त्रीय संगीत की गरिमा को जीवंत कर दिया। इस दौरान रजित कपूर ने कलाकार को सम्मानित भी किया।

देर रात उद्घाटन दिवस का समापन पद्मश्री सम्मानित उल्हास कशालकर के हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन से हुआ, जिसने पूरे परिसर को ध्यानमय और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर कर दिया।

मंगलवार को हठ योग, नाद योग, ध्यान साधना, श्रमदान और विभिन्न गहन कार्यशालाओं का आयोजन होगा। शाम के सांस्कृतिक सत्रों में महमूद फारूकी द्वारा दास्तानगोई, देबाशीष रियांग द्वारा होजागिरी नृत्य तथा शशाधर आचार्य द्वारा सरायकेला छऊ नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। दिन का समापन सुजाता महापात्र के ओडिसी नृत्य और रोनू मजूमदार के बांसुरी वादन से होगा।


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