प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज (सोमवार) विश्व वन्यजीव दिवस पर ग्रह की अविश्वसनीय जैव विविधता की रक्षा और संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ''आज विश्व वन्यजीव दिवस पर आइए हम अपने ग्रह की अविश्वसनीय जैव विविधता की रक्षा और संरक्षण की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएं। इसमें हर प्रजाति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आइए आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके भविष्य की रक्षा करें। हमें वन्यजीवों के संरक्षण और सुरक्षा में भारत के योगदान पर भी गर्व है।'' प्रधानमंत्री का वन्यजीव प्रेम किसी से छुपा नहीं है। उन्होंने आज अपने गृह राज्य गुजरात में विश्व वन्यजीव दिवस पर जूनागढ़ जिले में स्थित गिर वन्यजीव अभयारण्य में जंगल सफारी का आनंद लिया और एशियाई शेरों को करीब से देखा।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी डीएसएलआर कैमरे से एशियाई शेरों की तस्वीरें खींचते नजर आए। उन्होंने एक ऐसी भी तस्वीर खींची जिसमें मादा शेरनी अपने शावक को दुलारती नजर आ रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पोस्ट में एक वीडियो क्लिप भी अपलोड की। इसमें वो भारत की परंपरा में जैव विविधता के प्रति स्वाभाविक आग्रह का जिक्र कर रहे हैं। यह क्लिप 2023 की है। कर्नाटक के मैसूर में प्रोजेक्ट टाइगर के 50 वर्ष पूरे होने के स्मरणोत्सव कार्यक्रम में उन्होंने विचार रखे थे। उन्होंने दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों के मन में अन्य देशों, जहां बाघों की आबादी या तो स्थिर है या फिर उसमें गिरावट हो रही है, की तुलना में भारत में बाघों की बढ़ती आबादी के बारे में उठने वाले सवालों को दोहराया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, ''भारत इकोलॉजी और अर्थव्यवस्था के बीच संघर्ष में विश्वास नहीं करता, बल्कि वह दोनों के सह-अस्तित्व को समान महत्व देता है।''
यहां यह महत्वपूर्ण है कि जबसे मोदी सरकार आई है तब से देश ने बाघों के संरक्षण में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। 2010 में भारत में करीब 1,700 बाघ थे। 2022 में उनकी संख्या बढ़कर 3,600 से भी ज्यादा हो गई है। यानी सिर्फ 12 साल में बाघों की संख्या दोगुनी हो चुकी है। आज, दुनिया के करीब 75 फीसद बाघ भारत में रहते हैं। यह वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी सफलता है और हम सब भारतवासियों के लिए गर्व का पल है। यह सरकार और समाज के सामूहिक प्रयास से संभव हुआ है।
मोदी सरकार के कठोर प्रतिबंधों की भी इसमें बड़ी भूमिका है। सरकार ने बाघों के शिकार करने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई है। यही नहीं, बाघों के रहने वाले जंगलों को पूरी तरह से सुरक्षित किया गया ताकि वह अपना जीवन बिना किसी खतरे के जी सकें। बाघों के शिकार (जैसे हिरण) की संख्या पर ध्यान दिया गया ताकि बाघों को पर्याप्त भोजन मिलता रहे। समाज को बाघों से जुड़ी जानकारी दी गई और गांवों में बाघों से जुड़े संघर्षों को कम करने के उपायों पर तेजी से काम किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी का जूनागढ़ जिले में स्थित गिर वन्यजीव अभयारण्य में जंगल सफारी का आनंद लेना अनायास नहीं है। दरअसल भारत में शेरों की आबादी भी बढ़ी है। वैसे भी देश में शेरों का संरक्षण सांस्कृतिक और पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण है। शेर भारत के राष्ट्रीय प्रतीक का अभिन्न और महत्वपूर्ण अंग हैं। शेरों का भारतीय मुद्रा और आधिकारिक दस्तावेजों में दिखाई देता है। भारत एशियाई शेरों का घर है। एशियाई शेर सिर्फ गुजरात के गिर के जंगलों में पाए जाते हैं। इस क्षेत्र में संरक्षण प्रयासों ने शेरों की आबादी को 2015 में लगभग 523 से बढ़ाकर 2020 में लगभग 674 तक पहुंचा दिया। केंद्र सरकार की 15 अगस्त, 2020 को घोषित प्रोजेक्ट लायन महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य लंबे एशियाई शेरों के भविष्य को सुरक्षित करना है।
गुजरात में शेरों की संख्या और स्वास्थ्य की निगरानी के लिए नियमित रूप से गणना की जाती है। इसके अलावा आग प्रबंधन, बाढ़ की तैयारी और निरंतर वन्यजीव निगरानी जैसे उपाय यह सुनिश्चित करते हैं कि शेरों के पास सुरक्षित आवास हों और किसी भी आपात स्थिति का तुरंत समाधान किया जाए। बड़ी बात यह है कि अप्रैल 2023 में शुरू किया गया इंटरनेशनल बिग कैट्स एलायंस दुनिया भर में शेरों सहित बड़ी बिल्लियों के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहा है। शेरों के इतिहास की बात करें तो वह 30 लाख वर्ष पूर्व अफ्रीका और यूरेशियन महाद्वीप में विचरण करते थे। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि वर्तमान में पृथ्वी पर शेरों की उपस्थिति 30,000 से 100000 के बीच है।
जहां तक गिर वन्यजीव अभयारण्य का सवाल है तो वह एशिया में शेरों का एकमात्र निवास स्थान होने के कारण जाना जाता है। गिर अभयारण्य 1424 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 258 वर्ग किलोमीटर में राष्ट्रीय उद्यान और 1,153 वर्ग किलोमीटर वन्य प्राणियों के लिए आरक्षित अभयारण्य है। पास में ही मितीयाला वन्य जीव अभयारण्य है।माना जाता है कि विश्व में अफ़्रीका के बाद गिर में शेर बचे हैं। गिर के जंगल को सन 1969 में वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया था।
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्र सरकार ने एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट लॉयन के तहत 2900 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर की है। एशियाई शेर गुजरात के नौ जिलों के 53 तालुकाओं में लगभग 30 हजार वर्ग किलोमीटर में निवास करते हैं। राष्ट्रीय परियोजना के तहत जूनागढ़ जिले के न्यू पिपल्या में 20.24 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर वन्यजीवों के चिकित्सीय निदान एवं रोगों से बचाव के लिए राष्ट्रीय रेफरल केंद्र स्थापित किया जा रहा है। सासण में उच्च तकनीक से युक्त निगरानी केंद्र और एक अत्याधुनिक अस्पताल स्थापित किया है।
लेखक - मुकुंद
