गोविंद बल्लभ पंत को एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और एक सक्षम प्रशासक के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जन्म 10 सितंबर 1887 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के खूंट गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम मनोरथ पंत और माता का नाम गोविंदी था। पंत का परिवार महाराष्ट्र से संबंधित था, और उनकी परवरिश उनके नाना बद्रीदत्त जोशी के घर में हुई, जिनका उनके व्यक्तित्व और राजनीतिक विचारों पर गहरा प्रभाव था।
प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद, गोविंद ने 1905 में अल्मोड़ा से इलाहाबाद आकर आगे की पढ़ाई शुरू की। 1909 में उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की, और विश्वविद्यालय में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने पर उन्हें 'लम्सडैन' स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इसके बाद, उन्होंने काशीपुर में वकालत शुरू की। पढ़ाई के दौरान वे राष्ट्रीय कांग्रेस के संपर्क में आए और काकोरी कांड में रामप्रसाद बिस्मिल और अन्य क्रांतिकारियों के मुकदमे की पैरवी की।
गोविंद बल्लभ पंत कांग्रेस में शामिल हुए और असहयोग आंदोलन का हिस्सा बने। महात्मा गांधी के नेतृत्व में जब 1920 में असहयोग आंदोलन शुरू हुआ, तो पंत ने इस आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने 1930 में नमक सत्याग्रह में भी भाग लिया, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भी पंत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जहां वह तीन साल तक अहमदनगर किले में बंद रहे।
पंत तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 1937 से 1939 तक वे संयुक्त प्रांत के मुख्यमंत्री बने और 1946-47 के बीच भी इस पद पर कार्यरत रहे। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, वे 1954 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 1955 में, पंत ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली और 1955 से 1961 तक केंद्रीय गृहमंत्री के रूप में कार्य किया। उनके योगदान के लिए उन्हें 1957 में 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया।
उनकी निस्वार्थ सेवा की एक मिसाल तब देखने को मिली जब एक सरकारी बैठक में चाय-नाश्ते का बिल आया। पंत जी ने सरकारी खर्चे से नाश्ते का बिल पास करने से मना किया और स्वयं अपनी जेब से भुगतान किया। उनका मानना था कि सरकारी खजाना जनता का है, न कि मंत्रियों का।
गोविंद बल्लभ पंत का 7 मार्च 1961 को निधन हो गया। उन्होंने अपनी जीवन भर की निस्वार्थ सेवा और ईमानदारी से भारतीय राजनीति और प्रशासन में एक उच्च मानक स्थापित किया।
