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परंपराओं एवं संस्कृति से भी अलग है प्रमुख भारतीय जनजाति 'लेपचा' की पहचान

Date : 12-Nov-2023

 नई दिल्ली, 12 नवंबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सैनिकों के साथ अपनी 10वीं दीपावली मनाने के लिए रविवार को हिमाचल प्रदेश के लेपचा गांव पहुंच गए। वह यहां भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों के साथ दिवाली का त्योहार मनाएंगे। तिब्बत सीमा पर भारत के इस आखिरी गांव में भारत की प्रमुख जनजातियों में से एक लेपचा की आबादी है। इन्हें रोंग भी कहते हैं। भारत की इस प्रमुख जनजाति की अपनी अलग परंपरा (प्रथा) एवं संस्कृति है।



सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने दो माह पहले अगस्त में आदिवासी लेपचा संस्कृति को संरक्षित करने के लिए कई उपायों की घोषणा की है। यह फैसला लेपचा भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की लंबे समय से चली आ रही मांगों के बीच लिया गया है। भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में भारत गणराज्य की आधिकारिक भाषाओं की सूची है।

दरअसल, यह जनजाति प्रमुख रूप से पूर्वी नेपाल, पश्चिमी भूटान, तिब्बत के कुछ क्षेत्र, भारत के सिक्किम, पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, मिरिक, पोखरियाबोंग, कुर्सीओंग में पाई जाती है। एक अनुमान के मुताबिक कुल मिलाकर देश में इनकी संख्या 46 हजार है। भारत के अन्य क्षेत्रों में 11 हजार, सिक्किम में 25 हजार और भूटान में 10 हजार के आसपास, तिब्बत और नेपाल में जनजाति लेपचा की संख्या नगण्य है।


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