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किसानों को बहुआयामी लाभ देंगे मोटे अनाज : प्रो. मुकेश पाण्डेय

Date : 21-Feb-2024

 झांसी,21 फरवरी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.मुकेश पाण्डेय ने कहा कि बाजरे समेत विविध मोटे अनाजों की खेती किसानों के लिए अति उपयोगी है। यदि वे इन्हें दिल से अपनाएं तो ये मोटे अनाज उन्हें बहुआयामी लाभ देंगे। प्रो. पाण्डेय ने यह उद्गार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र और वित्त के तत्वावधान में बुधवार को आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में व्यक्त किए।

टिकाऊ भविष्य के लिए मोटे अनाजों के उत्पादन और उनके अनुभव विषय पर इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्चर एंड टाउन प्लानिंग के सभागार में आयोजित एकदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में कुलपति प्रो. पाण्डेय ने कहा कि मोटे अनाज विटामिन और सूक्ष्म तत्वों का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। ये मनुष्य और उनके मवेशियों की सेहत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनकी अनेक प्रजातियां हैं। यदि किसान इन्हें अपनाएं तो यह उनके बहुआयामी लाभ का माध्यम बनेंगे। जो लोग इन्हें अपनाए हुए हैं, वे लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बुविवि की विशिष्टताओं को ध्यान में रखकर नेक ने उसे ए प्लस ग्रेड दिया है। यही नहीं, हाल ही में केंद्र और राज्य सरकार ने इसे पीएम उषा मेरू योजना के तहत चुना है। विवि में शोध और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की खातिर सौ करोड़ रुपये मिलेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस योजना से बुंदेलखंड क्षेत्र के विद्यार्थियों को बहुआयामी शोध के अवसर मिलेंगे। विविध अनुसंधानों का लाभ क्षेत्र के किसानों को भी मिलेगा।

शुरुआत में अर्थशास्त्र एवं वित्त विभाग के प्रो. सी बी सिंह ने बाजरा पर अपने निर्देशन में पूरी हुई मोटे अनाज की विशेष परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मोटे अनाजों की खेती किसानों को बहुआयामी सुरक्षा कवच प्रदान करती है। सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्होंने श्री अन्न की खेती के फायदे गिनाए।

मुख्य अतिथि ब्राजील की प्रो. बेट्रिज लूसिया ने कहा कि सन् 2023 को यूएनओ की ओर से अंतरराष्ट्रीय मोटे अनाजों यानी मिलेट का वर्ष घोषित किया जाना अति महत्वपूर्ण है। इससे सबको बहुआयामी लाभ मिलेंगे।

ग्रासलैंड के प्रो. पुरुषोत्तम शर्मा ने बाजरा और ज्वार की विविध प्रजातियों और उनकी विशिष्टताओं का उल्लेख किया। उन्होंने मोटे अनाजों के उत्पादन में अग्रणी राज्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गेहूं और धान की खेती की तुलना में यह ज्यादा लाभकारी है। उन्होंने कहा कि बाजरा समेत विविध मोटे अनाज किसान और उनके मवेशियों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। ये हर वातावरण में पैदा किए जा सकते हैं। इससे विविध उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इसकी खूबियों को देखते हुए सरकार यह चाहती है कि अधिकाधिक किसान इसको अपनाएं। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि लोगों ने अपनी आहार शृंखला से अलग कर दिया था। ऐसे में बाजार में उसकी मांग घटी। अब कुछ सालों से इसके प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। उन्होंने सुझाव दिया कि मोटे अनाजों की विविध प्रजातियों के बारे में किसानों को जागरूक किया जाना चाहिए।

आईसीएसएसआर की स्पांसरशिप में बाजरे समेत विभिन्न मोटे अनाजों पर छह माह की एक विशेष परियोजना के समन्वयक प्रो. सीबी सिंह रहे। इसमें सह समन्वयक के रूप में डाॅ. राधिका चौधरी, डाॅ. अंकिता जैस्मिन लाल, डाॅ. शिल्पा मिश्रा, डाॅ. ज्योति मिश्रा, विद्यार्थी सृष्टि, हेमंत और राहुल शामिल रहे। इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए कुलपति प्रो. पाण्डेय ने सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों की सराहना की। कार्यशाला में प्रोजेक्ट से संबंधित वीडियो का प्रदर्शन भी किया गया। डाॅ. शिल्पा मिश्रा ने शोध परियोजना के अनुभवों की जानकारी सभी से साझा की। डाॅ. विश्व भास्कर चौधरी ने कहा कि तापमान में हो रही वृद्धि के चलते मोटे अनाजों को अपनाना मजबूरी होगी। आने वाले समय में यह ज्यादा लाभकारी फसल होंगे।

इस कार्यक्रम में प्रो. अनिल कुमार चौहान, प्रो. करुणाकर सिंह, प्रो. निशि राय, डाॅ. एम एस खान, डाॅ. यशोधरा शर्मा, कुलसचिव विनय कुमार सिंह, डाॅ. शंभू नाथ सिंह, डाॅ. फुरकान अहमद, डाॅ. अमिताभ गौतम, डाॅ. नुपूर गौतम, डाॅ. राजेश पाण्डेय, डाॅ. अतुल गोयल, आर्किटेक्ट प्रदीप यादव, जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान के शिक्षक उमेश शुक्ल, समाजसेवी श्याम बिहारी गुप्त समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।

इस कार्यशाला में पूजा मल्होत्रा ने कहा कि हमें अपने बच्चों को बाजरा और मोटे अनाजों के महत्व के बारे में बताना होगा। तभी हम इनकी मांग बढ़ा सकेंगे। समाजसेवी अशोक कुमार अग्रवाल ने कहा कि अपनी खूबियों के कारण अब लोगों को बाजरा समेत विविध मोटे अनाजों का महत्व समझ में आ रहा है। उम्मीद है कि आगे इनकी मांग और बढ़ेगी। इस कार्यशाला में किसान खूब सिंह ने भी अपने अनुभव साझा किए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी विचार रखे।


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