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महंगाई रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है केन्द्र सरकार: निर्मला सीतारमण

Date : 20-Feb-2023

जयपुर, 20 फ़रवरी । केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि केन्द्र सरकार महंगाई राेकने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत है और बजट 2023 में इस ओर आवश्यक कदम उठाए गए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक भी अर्थव्यवस्था पर नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर फैसला ले रहा है। उन्होंने राजस्थान समेत कई कांग्रेस शासित प्रदेशों द्वारा घोषित पुरानी पेंशन स्कीम को अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक बताते हुए न्यू पेंशन स्कीम के तहत केन्द्र के पास जमा पैसा राज्यों को पुन: लौटाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ये कानून के खिलाफ होगा। सीतारमण केंद्रीय बजट 2023 पर विभिन्न हित कारकों के साथ चर्चा के बाद सोमवार को जयपुर में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रही थी।

वित्त मंत्री ने महंगाई कम करने के लिए बजट 2023 में किए गए प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि हमने दलहन के लिए इंसेंटिव जारी किए हैं ताकि उत्पादन बढ़ाया जा सके। जो भी दाल हम आयात कर रहे हैं, उसपर ड्यूटी घटाई गई है ताकि आम आदमी को दाल बाजार में सस्ती मिल सके। इसके अलावा जो खाद्य तेल हम आयात कर रहे हैं, उसे हमने इंपोर्ट फ्री कर दिया है, ताकि खाद्य तेल की सप्लाई तेजी और आसानी से हो। इसके अलावा कोविड काल और उसके बाद भी हमने गरीबों को गेहूं और चावल प्रधानमंत्री गरीब अन्न योजना के तहत मुफ्त वितरित किए। इसके अलावा हम अनाजों पर इंपोर्ट ड्यूटी भी कम करते जा रहे हैं। इन सभी कदमों से आज हम महंगाई को एक तय लिमिट में ला पाए हैं।

पेट्रोल डीजल को जीएसटी के दायरे में लाए जाने के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह केन्द्र सरकार फैसला नहीं कर सकती है। यह निर्णय जीएसटी काउंसिल पर निर्भर करता है और जीएसटी काउंसिल में सभी प्रदेशों के वित्त मंत्री शामिल हैं। सभी राज्यों के वित्त मंत्री यह तय करें तो यह हो सकता है। कांग्रेस के आरोपों पर उन्होंने कहा कि एक भी कांग्रेस का वित्त मंत्री यह बताएं कि उन्होंने रेट कम करने के लिए क्या किया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार में डूबी कांग्रेस के मुंह से पक्षपात के आरोप अच्छे नहीं लगते हैं। कांग्रेस पार्टी को भ्रष्टाचार के बारे में कुछ भी कहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने संसद में कांग्रेस के हर सवाल का जवाब दिया, लेकिन वह सुनना ही नहीं चाहते। संसद से चले जाते हैं।

संसद में बहस पर जवाब के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा अडाणी का नाम नहीं लिये जाने के आरोपों पर सीतारमण ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह मामला कोर्ट देख रहा है, इसलिए इस बारे में कुछ भी कहा नहीं जा सकता है।

ओल्ड पेंशन स्कीम को कुछ कांग्रेस शासित राज्यों की घोषणा पर वित्त मंत्री ने कहा कि यह ट्रेंड अच्छा नहीं है। केवल स्टेट अपनी लायबिलिटी कम कर रहे हैं। बिना बजटीय प्रावधान के ओपीएस की घोषणा कर कुछ कांग्रेस शासित प्रदेश अपना पैसा मांग रहे हैं जबकि यह कानून का उल्लंघन है। क्योंकि यह पैसा कर्मचारी का है, इसे नियोक्ता वापस नहीं ले सकता है। अतः राज्य को यह पैसा नहीं मिलेगा। केवल रिटायरमेंट या जरूरत पर कर्मचारी ही इस पैसे का असली हकदार है।

केंद्र संवर्धित योजनाओं में केंद्र का पैसा बैंकों में जमा होने पर आ रही दिक्कतों पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा उठाए गए सवालों पर वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डॉ टी.वी. सोमनाथ ने बताया कि केंद्र संवर्धित योजनाओं के तरीके में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। पहले केंद्र का पैसा सरकारी ट्रेजरी में जमा होता था, जिस कारण यह पैसा समय पर खर्च नहीं हो पाता था। यहां तक कि कई राज्य सरकार उन्हें अपने काम में ले लेती थीं। अब भी पैसा पहले ट्रेजरी में ही जमा हो रहा है लेकिन यह केवल 20 दिन तक रहता है और उसके बाद संबंधित बैंक में जमा करा दिया जाता है। उसके साथ ही चालीस दिन में राज्य को भी अपने हिस्से का पैसा बैंक में जमा कराना होता है ताकि योजनाओं पर सही तरीके से खर्च हो और योजनाएं समय पर पूरी हों और कार्य क्रियान्वयन में पारदर्शिता आए।

राज्य सरकार की कथित जनकल्याणकारी योजनाएं, जिन्हें केंद्र रेवडियों की संज्ञा देता है और केंद्र की मुफ्त अनाज वितरण योजनाओं में अंतर स्पष्ट करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि यदि सरकार की वित्तीय स्थिति ठीक है और बजट प्रावधानों के तहत फंड का संचालन किया जाए ताकि पैसा आपके पास रहे किसी से उधार मांगना ना पड़े, उन योजनाओं में केंद्र सरकार को कोई दिक्कत नहीं है। यदि आप की वित्तीय हालत ठीक नहीं है और योजना को लेकर बजट में प्रावधान नहीं किया गया है।उधारी मांग कर आप घोषणाएं कर वाहवाही लूटते हैं तो यह रेवड़ी है। उन्होंने कहा कि वादा आप करते हैं और भार कहीं और शिफ्ट हो जाता है, यह गलत है।

बाड़मेर रिफाइनरी और पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को लेकर राजनीतिक भेदभाव से इनकार करते हुए सीतारमण ने कहा कि जब गुजरात को नर्मदा का पानी चाहिए था तब यूपीए सरकार ने इस योजना को रोके रखा। राजनीतिक कारणों से अब ईआरसीपी को लेकर यदि कांग्रेस राजनीतिक दुर्भावना की बात करती है तो यह गलत है, क्योंकि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दौसा में ईआरसीपी योजना का जिक्र करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार इस योजना के लिए प्रतिबद्ध है। क्योंकि कांग्रेस की भाषा और डिक्शनरी में केवल विरोध करना ही है, इसलिए विरोध किया जा रहा है। राजनीतिक कारणों से देश के विकास को रोकने वाली कांग्रेस केवल अपने परिवार और नेतृत्व के लिए ही गंभीर है, उसे देश के विकास से कोई लेना ना नहीं है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तंज कसा। गहलोत पर तंज कसते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यहां तो बहुत गड़बड़ है, पिछले साल का बजट इस साल पढ़ रहे हैं। मैं उनके लिए प्रार्थना करती हूं। हालांकि, सीतारमण ने आगे कहा कि गलती किसी से भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पिछला बजट पढ़कर उसे डिब्बे में डाल दिया और जब दोबारा बजट पढ़ने की बारी आई तो, वही डिब्बा खोलकर पुराना बजट ही पढ़ दिया। यह एक बहुत बड़ी गड़बड़ है और मैं उनके लिए प्रार्थना करूंगी।


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