15 नवम्बर : जनजातीय गौरव दिवस
Date : 15-Nov-2024
जनजातीय समाज ने एक ओर वन, पर्वत और नदियों के संरक्षण के माध्यम से संपूर्ण प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा में अपना जीवन समर्पित किया है वहीं राष्ट्र पर संकट आते ही युद्ध के मैदान में प्रत्येक विदेशी आक्रमण का सशस्त्र सामना भी किया है । समाज, संस्कृति और राष्ट्र के लिये जनजातीय समाज के अभूतपूर्व योगदान का स्मरण करने केलिये प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी ने 15 नवम्बर को जनजातीय गौरव दिवस आयोजन करने की परंपरा आरंभ की । 15 नवम्बर बलिदानी भगवान बिरसा मुँडा की जयंति है ।
भारत यदि सोने की चिड़िया रहा है, विश्व गुरु रहा है तो इसमें जनजातीय समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है । सोने की चिड़िया का अर्थ है आर्थिक संपन्नता और विश्व गुरु होने का अर्थ ज्ञान विज्ञान में सर्वोपरि। भारत की संपन्नता शिल्प, कौशल और विशिष्ट तकनीकि से निर्मित वस्तुओं के निर्यात में रही है। इनका निर्माण जनजातीय समाज के कुटीर उद्योगों में होता था । इसकी झलक जनजातीय समाज की रंगोली, भीति चित्रों में मिलती है । यहाँ से ये वस्तुएँ जलयानों द्वारा दुनियाँ भर में जातीं थीं और बदले में सोना आता था इसलिए भारत सोने की चिड़िया कहलाया । प्राचीन भारत में शिक्षा, चिकित्सा और अनुसंधान के सभी केन्द्र वन में होते थे। इनका संचालन तो ऋषि महर्षि करते थे लेकिन इन केन्द्रों और आश्रमों सुरक्षा से लेकर अन्न सामग्री जुटाने तक की संपूर्ण व्यवस्था जनजातीय समाज के बंधुओं के हाथ में ही होती थी । इन आश्रमों की सुरक्षा केलिये संघर्ष और व्यवस्था केलिये धन जुटाने की कथाओं का वर्णन पुराणों में है।
प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी ने जनजातीय गौरव दिवस आयोजन की शुरुआत भले वर्ष 2021 से की लेकिन वे अपने प्रथम कार्यकाल से ही जनजातीय समाज के गौरवशाली अतीत को पूरे देश के सामने लाने के लिये प्रयत्नशील रहे हैं। प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी ने केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय के रूप में संरक्षित और पुनःस्थापित किया। संग्रहालय का यह भवन पहले जेल थी । इसी जेल में भगवान बिरसा मुंडा कैद रहे थे । यह संग्रहालय लगभग 25 एकड़ में फैला है । केन्द्र और राज्य सरकार की संयुक्त योजना के अंतर्गत इसको अंडमान निकोबार की कालापानी जेल की तरह लाइट और साउंड शो का आयोजन किया जाता है । इसमें भगवान बिरसा का जीवन वृत भी दिखाया जाता है । यह पर्यटकों में आकर्षण का केंद्र है । संग्रहालय के बाहरी परिसर में भगवान बिरसा मुँडा के ग्राम उलिहातू का स्वरूप बनाया गया है। संग्रहालय में भगवान बिरसा मुंडा की 25 फीट की मूर्ति भी स्थापित की गई है। इसके साथ ही, संग्रहालय में विभिन्न आंदोलनों से जुड़े अन्य स्वतंत्रता सेनानियों जैसे शहीद बुधू भगत, सिद्धु-कान्हू, नीलांबर-पीतांबर, दिवा-किसुन, तेलंगा खड़िया, गया मुंडा, जात्रा भगत, पोटो एच, भागीरथ मांझी, गंगा नारायण सिंह की नौ फीट की मूर्तियां भी शामिल हैं। इस संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री ने 15 नवंबर 2021 को पहले जनजातीय गौरव दिवस पर किया था।