नागपुर, 14 सितंबर। शालिवाहन शक पंचाग के अनुसार सावन अमावस्या के दूसरे दिन महाराष्ट्र के नागपुर में लगभग 127 वर्षों से मारबत का उत्सव मनाया जाता है। काली, पीली मारबत और बडग्या के प्रतीकात्मक पुतलों की यात्रा निकाल कर दहन किया जाता है। शुक्रवार को होने वाले इस उत्सव को लेकर नागपुर वासियों में खासा उत्साह नजर आ रहा है।
हमारे कृषि प्रधान देश में महाराष्ट्र और कर्नाटक ऐसे राज्य हैं जहां किसानों के दोस्त कहे जाने वाले बैल को पोला त्योहार पर सम्मान दिया जाता है। भारतीय सभ्यता के अनुसार मनुष्य जीवन से जुड़ी सृष्टि की अवधारणा में पर्यावरण में मौजूद नदियां, पहाड़, पशु-पक्षी सभी का समावेश होता है। नतीजतन किसान की मेहनत में साझेदार बैल के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए पोला त्योहार मनाया जाता है। नागपुर में इस दो दिवसीय त्योहार के दूसरे दिन मारबत निकालने की परंपरा है। इसमें काली मारबत 1881 और पीली मारबत 1885 से निकाली जाती है। इन दोनों मारबत मूर्तियों की अलग-अलग यात्राएं निकलती हैं और बीच रास्ते में यह दोनों यात्राएं मिलकर आगे का रास्ता एकसाथ तय करती हैं। इस मौके पर “इडा, पीडा, खासी खोकला घेऊन जा गे मारबत!” ऐसी घोषणाएं की जाती हैं।
