राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आज इस बात पर ज़ोर दिया कि संगठन के भीतर चर्चाएँ धारणाओं पर नहीं, बल्कि तथ्यों पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने यह बात 'संघ की 100 वर्ष यात्रा: नए क्षितिज' विषय पर तीन दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कही। उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, संघ प्रमुख ने इस बात पर ज़ोर दिया कि राष्ट्र को फिर से महान बनाने का एकमात्र उपाय समाज का गुणात्मक विकास और देश की प्रगति में संपूर्ण समाज की भागीदारी है।
श्री भागवत ने कहा कि संघ की संस्कृति सद्भावनापूर्वक रहने की है। उन्होंने संघ के प्रति स्वयंसेवकों के कार्य और समर्पण की भी सराहना की।
