राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने आत्मनिर्भरता को राष्ट्र की प्रगति की कुंजी बताते हुए स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया है। कल शाम नई दिल्ली में आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार दबाव में नहीं, बल्कि स्वेच्छा से होना चाहिए।
श्री भागवत ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का अर्थ आयात पूरी तरह रोकना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्र अपनी आवश्यकताओं और हितों के अनुसार ही वैश्विक व्यापार में भाग ले। उन्होंने कहा कि दुनिया एक-दूसरे पर निर्भर है और आयात-निर्यात चलता रहेगा, लेकिन किसी प्रकार का बाहरी दबाव नहीं होना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सच्ची स्वदेशी भावना तभी विकसित होगी, जब देशवासी अपने उत्पादों को प्राथमिकता देंगे और अपने निर्णय स्वयं लेंगे, न कि वैश्विक दबावों के अधीन होकर।
