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जबलपुर एयरपोर्ट से मात्र 9 फ्लाइटों का संचालन, मप्र हाईकोर्ट ने उड्डयन मंत्रालय को भेजा नोटिस

Date : 28-Aug-2025


जबलपुर, 28 अगस्त । मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित डुमना एयरपोर्ट के विस्तार पर केंद्र सरकार ने 400 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए, लेकिन इसके बाद भी यहां एयर कनेक्टिविटी बढ़ने के बजाय लगातार घटती गई। वर्तमान में एयरपोर्ट से सिर्फ नौ फ्लाइटें संचालित हो रही हैं। इसको लेकर लगी एक हस्तक्षेप याचिका पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय (डीजीसीए) और एयरलाइंस कंपनियों को नोटिस जारी कर 10 दिन में जवाब मांगा है।

दरअसल, जबलपुर एयरपोर्ट से कम फ्लाइटों के संचालन को लेकर नागरिक उपभोक्ता मंच की ओर से दायर याचिका के बाद अब लॉ के विद्यार्थी पार्थ श्रीवास्तव ने हस्तक्षेप याचिका दायर की, जिस पर गुरुवार को उच्च न्यायालय की जबलपुर स्थित मुख्य खंडपीठ में सुनवाई हुई। लॉ विद्यार्थी पार्थ श्रीवास्तव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने दलील दी कि जबलपुर से केवल नौ उड़ानें हैं, जबकि भोपाल से रोजाना 50, इंदौर से 80 और ग्वालियर से 20 से ज्यादा उड़ानें संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि फ्लाइट की कमी से न केवल मरीज और डॉक्टर प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि उच्चतम न्यायालय जाने वाले अधिवक्ता भी परेशान हैं।

अधिवक्ता संघी ने बताया कि यात्रियों को अक्सर नागपुर, भोपाल या इंदौर होकर कनेक्टिंग फ्लाइट लेनी पड़ती है। जबकि जबलपुर में उच्च न्यायालय की मुख्य खंडपीठ होने की वजह से यहां का एयर ट्रैफिक ज्यादा है। इसके अलावा पास में चार नेशनल टाइगर रिजर्व और पर्यटन स्थलों के कारण भी हवाई कनेक्टिविटी जबलपुर के लिए जरूरी है।

मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ में याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय, डीजीसीए, एयरपोर्ट अथॉरिटी, डुमना एयरपोर्ट डायरेक्टर और एयरलाइंस कंपनियों (एयर इंडिया, इंडिगो, स्पाइसजेट, एयर इंडिया एक्सप्रेस) को नोटिस जारी किया है, जिसमें 10 दिन में उच्च न्यायालय में जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है।

बता दें कि इससे पहले 12 अगस्त को नागरिक उपभोक्ता मंच की याचिका पर हाईकोर्ट ने एयरलाइंस से पूछा था कि डुमना एयरपोर्ट बंद क्यों न कर दिया जाए? उस समय एयरलाइंस ने ज्यादा टैक्स का हवाला देते हुए फ्लाइट संचालन में असमर्थता जताई थी। पहले जबलपुर से मुंबई, पुणे, कोलकाता और बेंगलुरु जैसी बड़ी उड़ानें चलती थीं, लेकिन धीरे-धीरे फ्लाइटें बंद हो गईं। पहले यहां से औसतन 15 फ्लाइटें संचालित होती थीं, जो अब घटकर नौ रह गई हैं।


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