प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने टोक्यो में 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए एक विस्तृत 10-वर्षीय रणनीतिक रोडमैप का अनावरण किया।
द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख बिंदु:
-
10 ट्रिलियन येन का निवेश लक्ष्य: दोनों देशों ने अगले एक दशक में जापान द्वारा भारत में 10 ट्रिलियन येन (लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपये) निवेश का लक्ष्य तय किया।
-
प्रमुख सहयोग क्षेत्र: नवाचार, स्वास्थ्य, पर्यावरण, प्रौद्योगिकी, गतिशीलता, स्टार्ट-अप्स, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और लोगों के बीच आदान-प्रदान।
-
मानव संसाधन साझेदारी: दोनों देशों के बीच 5 लाख से अधिक पेशेवरों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य।
-
रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा को मज़बूत करने पर सहमति।
तकनीकी और अंतरिक्ष सहयोग:
-
LUPEX मिशन में सहयोग: भारत के चंद्रयान-5 कार्यक्रम में ISRO और जापान की JAXA मिलकर कार्य करेंगे।
-
सेमीकंडक्टर उत्पादन: सेंडाई स्थित टोक्यो इलेक्ट्रॉन फैक्ट्री का दौरा करते हुए दोनों नेताओं ने आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन पर ज़ोर दिया।
आर्थिक सुरक्षा और रणनीतिक पहल:
-
आर्थिक सुरक्षा समझौता: पाँच प्राथमिकता वाले क्षेत्र — सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, फार्मा, ICT, और स्वच्छ ऊर्जा — में सहयोग।
-
'जापान-भारत एआई पहल' का शुभारंभ: बड़े भाषा मॉडल, डेटा केंद्र और एआई गवर्नेंस पर सहयोग को बढ़ावा।
लोकतांत्रिक और वैश्विक दृष्टिकोण:
-
हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण: दोनों देशों ने एक मुक्त, स्वतंत्र, नियम-आधारित और समृद्ध हिंद-प्रशांत के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
-
लोकतांत्रिक मूल्यों पर बल: पीएम इशिबा ने भारत के वैश्विक प्रभाव और कुशल मानव संसाधन की सराहना की।
भविष्य की योजनाएँ:
-
भारत ने फरवरी 2026 में होने वाले एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन में जापान को आमंत्रित किया।
-
दोनों देशों ने राज्य और प्रान्त स्तरीय साझेदारी को और गहरा करने पर सहमति जताई।
प्रधानमंत्री मोदी की दो दिवसीय जापान यात्रा के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय राज्यपाल संघ, उद्योगपतियों और प्रमुख तकनीकी संस्थानों से भी मुलाकात की। अब वे सेंडाई से शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन रवाना होंगे।
यह शिखर वार्ता भारत और जापान के रिश्तों को एक नई रणनीतिक गति प्रदान करती है और दोनों देशों को वैश्विक मंच पर स्थिरता और विकास के साझेदार के रूप में स्थापित करती है।
