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बी टू बी की राजनीति में साफ फर्क – केदार कश्यप का कांग्रेस पर तीखा कटाक्ष

Date : 30-Aug-2025

छत्तीसगढ़ के वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विदेश यात्रा को राज्य के आर्थिक विकास और निवेश संभावनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री की इस यात्रा को "विकास की दिशा में सार्थक और सफल" बताते हुए छत्तीसगढ़ लौटने पर उनका स्वागत किया।

श्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री साय ने विदेश में व्यापारिक प्रतिनिधियों से जो संवाद किया, उसका सकारात्मक असर निकट भविष्य में ज़रूर दिखाई देगा। उन्होंने इसे “बी टू बी यानी बिजनेस टू बिजनेस” रणनीति का हिस्सा बताया और कहा कि भाजपा की सोच व्यापार, विकास और भविष्य निर्माण पर केंद्रित है।

इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनके लिए ‘बी टू बी’ का मतलब "भूपेश से बैज तक की अंतर्कलह" बन गया है। श्री कश्यप ने तंज कसते हुए कहा,

“जहां भाजपा ‘बिजनेस टू बिजनेस’ की दिशा में राज्य को आगे ले जाने में जुटी है, वहीं कांग्रेस ‘भूपेश टू बैज’ की आपसी खींचतान में फंसी है।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस में संवाद के बजाय हमेशा टकराव और असहमति का माहौल रहता है। आंतरिक कलह के चलते पार्टी राज्य के हितों से दूर हो चुकी है। वहीं भाजपा की सरकार अपने स्पष्ट विकास एजेंडे के साथ आगे बढ़ रही है।

श्री कश्यप ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार समर्पित भाव से काम कर रही है, और इसका असर राज्य की जनता को हर स्तर पर दिखाई दे रहा है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इंडिया टुडे-सी वोटर सर्वे में मुख्यमंत्री साय को 41.9% समर्थन के साथ देश के दूसरे सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में स्थान मिला है, जो इस बात का प्रमाण है कि जनता उन्हें स्वीकार कर रही है और उनके कामों से संतुष्ट है।

मंत्री कश्यप ने अंत में यह भी कहा कि कांग्रेस के भीतर लगातार चल रही सिर-फुटव्वल और गुटबाज़ी यह दर्शाती है कि पार्टी आज भी अपने पुराने मानसिक ढांचे से बाहर नहीं निकल पाई है।

“कांग्रेस का इतिहास बँटवारे और बर्बादी से भरा रहा है, और दुर्भाग्यवश आज भी वह उसी राह पर चल रही है,” — ऐसा कहना था केदार कश्यप का।

एक ओर जहां भाजपा की सोच छत्तीसगढ़ के आर्थिक और औद्योगिक विकास पर केंद्रित है, वहीं कांग्रेस अपनी आंतरिक खींचतान से जूझती नज़र आ रही है। भाजपा इसे एक मौके की तरह देख रही है, वहीं कांग्रेस, खुद अपने रास्ते में बाधा बनती जा रही है।


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