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सोनल मानसिंह की ‘द जिगजैग माइंड’ का संशोधित संस्करण लॉन्च, रामनाथ कोविंद ने की प्रशंसा

Date : 01-Sep-2025

नई दिल्ली, 1 सितंबर। देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रख्यात नृत्यांगना और लेखिका सोनल मानसिंह की पुस्तक द जिगजैग माइंड के संशोधित संस्करण के विमोचन अवसर पर कहा कि सफलता का रास्ता कभी सीधा नहीं होता। इसके लिए जिगजैग संघर्ष करना पड़ता है, जिसमें कभी दाएं, कभी बाएं, कभी ऊपर, तो कभी नीचे जाना होता है।

नई दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले और आईजीएनसीए के सचितानंद जोशी भी उपस्थित थे।

कोविंद ने कहा कि यह पुस्तक न केवल सोनल मानसिंह की कला साधना का प्रतीक है, बल्कि उनकी जीवन यात्रा और संघर्ष की कहानी भी बयां करती है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक का पहला संस्करण 2022 में लॉन्च हुआ था, जिसे खूब सराहना मिली थी। कोविंद ने कामना की कि संशोधित संस्करण को इससे भी अधिक सफलता मिले। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोनल मानसिंह के साथ अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए कहा कि जब वे राष्ट्रपति थे, तब उन्होंने सोनल मानसिंह को राज्यसभा सांसद के लिए मनोनीत किया था। उनकी प्रोफाइल देखकर वे आश्चर्यचकित हुए थे कि ऐसी साधना करने वाली शख्सियतें आज भी देश में मौजूद हैं।

कोविंद ने कहा कि सोनल मानसिंह ने उनसे आग्रह किया था कि उनकी योग्यता और साधना को उनकी प्रोफाइल के माध्यम से जाना जाए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने सोनल मानसिंह की बहुमुखी प्रतिभा की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सोनल मानसिंह एक नृत्यांगना के रूप में जानी जाती हैं, लेकिन उनकी विद्वता इतनी गहन है कि वे किसी भी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बन सकती हैं। होसबले ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत सोनल जैसे व्यक्तियों के हाथों में सुरक्षित है। वे न केवल महाभारत और भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं की गहरी जानकार हैं, बल्कि कन्नड़, मराठी सहित कई भाषाओं में भी पारंगत हैं। उनकी पुस्तक में ज्ञान और अनुभव का अनूठा संगम है, जो पाठकों को भारतीय संस्कृति की गहराई से परिचित कराता है।

होसबले ने कहा कि सोनल मानसिंह अपनी कला और लेखन के माध्यम से भारतीय संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं। उनकी पुस्तक के विभिन्न अध्याय भारतीय संस्कृति, कला और जीवन दर्शन के गहन पहलुओं को उजागर करते हैं। यह पुस्तक पाठकों को न केवल प्रेरित करती है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को समझने का एक नया दृष्टिकोण भी प्रदान करती है। आईजीएनसीए के सचितानंद जोशी ने भी इस अवसर पर सोनल मानसिंह की कला और लेखन की सराहना की।


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