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नालंदा विश्वविद्यालय अध्यात्म का शाश्वत दीपस्तंभ है: शेरिंग टोबगे

Date : 04-Sep-2025

नालंदा, 4 सितंबर  बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सचिन चतुर्वेदी ने गुरुवार को भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे व उनकी धर्मपत्नी तथा उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का यहां स्वागत किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय की ओर से एक प्रतियोगिता आयोजित की गयी, जिसमें विद्यार्थियों ने शेरिंग टोबगे से 50 से अधिक प्रश्न पूछे। उन्होंने सभी प्रश्नों के उत्तर दिए।

मौके पर शेरिंग टोबगे ने कहा कि आज का नालंदा विश्वविद्यालय विविधतापूर्ण छात्र-शिक्षक समुदाय के माध्यम से उसी ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने छात्रवृत्ति, शैक्षणिक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक साझेदारी को मजबूत करने का प्रस्ताव रखा तथा नालंदा विश्वविद्यालय को भूटान में नवंबर में आयोजित होने वाले ग्लोबल पेप्सी प्रेयर फेस्टिवल में भाग लेने का आमंत्रण भी दिया।

प्रधानमंत्री टोबगे ने नालंदा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, “नालंदा केवल अतीत का विश्वविद्यालय नहीं है बल्कि यह शांति, एकता और अध्यात्म का शाश्वत दीपस्तंभ है, जो आज भी विश्व को प्रेरित करता है।” उन्होंने कहा कि भूटान विश्व का एकमात्र वज्रयान बौद्ध राज्य है और हम नालंदा की उस ऐतिहासिक भूमिका को गहराई से स्मरण करते हैं जिसने हमारी परंपराओं को आकार दिया। भविष्य में नालंदा के साथ हमारे सहयोग इस बंधन को और मजबूत करेंगे।

अवसर पर प्रो चतुर्वेदी ने कहा कि नालंदा भी सुख और कल्याण के अकादमिक मापदंडों पर शोध कर रहा है। उन्होंने भूटान की माइंड फुलनेस पहल की तुलना नालंदा की ध्यान-आधारित शिक्षा परंपरा से की।

प्रो. चतुर्वेदी ने कहा, “नालंदा शांति, ज्ञान और पारिस्थितिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। हमें भूटान के प्रधानमंत्री की मेज़बानी करने का सम्मान प्राप्त हुआ, जिनका सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता का दर्शन नालंदा की सामंजस्य और स्थिरता की भावना से गहराई से जुड़ा है।

उन्होंने कहा कि “अल-अजहर, बोलोनिया, ऑक्सफ़ोर्ड और पेरिस जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों से भी बहुत पहले, नालंदा महाविहार लगभग 2000 वर्षों तक विश्व का सबसे प्रमुख उच्च शिक्षा केंद्र रहा। यह केवल एक विश्वविद्यालय नहीं बल्कि विद्या और अध्यात्म का विशाल नगर था, जहाँ 10,000 से अधिक छात्र और विद्वान एक साथ निवास करते थे।


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