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वार्षिकी 2025 : चर्चा में रही ब्यूरोक्रेसी और सियासत

Date : 30-Dec-2025

 जयपुर, 30 दिसंबर। राजस्थान में साल 2025 ब्यूरोक्रेसी और सियासत के लिहाज से बेहद हलचल भरा और ऐतिहासिक रहा। सत्ता के गलियारों से लेकर विधानसभा और सड़कों तक, ऐसे विवाद और घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने प्रदेश की राजनीति और प्रशासन को लंबे समय तक चर्चा में बनाए रखा। कई फैसले और टकराव ऐसे रहे, जो दशकों तक याद किए जाएंगे।

ब्यूरोक्रेसी में भूचाल

सीएस–एसीएस की छुट्टी: साल 2025 की सबसे बड़ी प्रशासनिक घटना रही राजस्थान के मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव की एक साथ छुट्टी। भजनलाल सरकार के गठन के बाद दिल्ली से भेजे गए मुख्य सचिव आईएएस सुधांश पंत और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल के बीच लंबे समय से मनमुटाव की चर्चाएं थीं।

साल के आखिर में अचानक बड़ा फैसला हुआ, सुधांश पंत को दिल्ली रवाना हो गए और शिखर अग्रवाल को सीएमओ से हटा दिया गया। राजस्थान के प्रशासनिक इतिहास में यह पहली बार हुआ, जब शीर्ष स्तर के दो अधिकारियों पर एक साथ कार्रवाई हुई।

रील स्टार कहने पर सियासी रंग

टीना डाबी विवाद : सोशल मीडिया फेम और बाड़मेर की कलेक्टर टीना डाबी भी 2025 में विवादों के केंद्र में रहीं। छात्र आंदोलन के दौरान उन्हें ‘रील स्टार’ कहे जाने और उस पर हुई पुलिस कार्रवाई ने सियासी रंग ले लिया। यह मामला प्रशासन, राजनीति और मीडिया—तीनों में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा।

सियासत में विवादों की कतारगोविंद सिंह डोटासरा का निलंबन : साल की शुरुआत में ही राजस्थान विधानसभा से सियासी तूफान उठा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के बीच टकराव के बाद डोटासरा सहित कांग्रेस के कई विधायकों को निलंबित कर दिया गया। शीतकालीन सत्र के दौरान आसन पर अमर्यादित टिप्पणी का आरोप लगा, जबकि कांग्रेस का दावा रहा कि उस वक्त सदन की कार्यवाही स्थगित थी। निलंबन के विरोध में कांग्रेस ने विधानसभा का घेराव किया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।

विधानसभा जासूसी कैमरा विवाद : मानसून सत्र के दौरान विधानसभा की ‘ना’ पक्ष लॉबी में हिडन कैमरों से जासूसी के आरोपों ने प्रदेश की राजनीति को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विधायकों की बातचीत रिकॉर्ड की जा रही है। मामले में कई दिन तक सदन में हंगामा, कार्यवाही स्थगन और गतिरोध बना रहा। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर जांच की मांग की, वहीं महिला विधायकों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पीकर पर गंभीर आरोप लगाए।चुनावी झटके और अंदरूनी राजनीति

अंता उपचुनाव में बीजेपी को बड़ा झटका : अंता विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया ने करीब 15 हजार वोटों से जीत दर्ज की।

इस हार को बीजेपी की स्टार नेता वसुंधरा राजे के लिए बड़ा झटका माना गया। यहां तक कि पार्टी के अंदर से ही डैमेज की चर्चाएं भी चलती रहीं। खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रचार में पूरी ताकत झोंकी थी, इसके बावजूद हार ने सरकार और संगठन दोनों को असहज कर दिया।

फोन टैपिंग विवाद में अपने ही मंत्री ने लगाए आरोप : भजनलाल सरकार उस वक्त और घिर गई, जब कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने सार्वजनिक मंचों से फोन टैपिंग और जासूसी के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आज भी उनका फोन टैप हो रहा है और सीआईडी उनके पीछे लगी है। हालांकि सरकार ने विधानसभा में इन आरोपों को खारिज किया, लेकिन मंत्री ने कुछ ही दिनों बाद फिर दावा दोहराकर सरकार के जवाबों पर सवाल खड़े कर दिए।कांग्रेस में हलचल: मेवाराम जैन की वापसी : पूर्व विधायक मेवाराम जैन की कांग्रेस में वापसी ने पश्चिमी राजस्थान की राजनीति में हलचल मचा दी। छह साल पहले अश्लील वीडियो प्रकरण में निष्कासित किए गए जैन की वापसी पूर्व सीएम अशोक गहलोत की सिफारिश और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मंजूरी से हुई। जहां समर्थकों ने आतिशबाजी कर खुशी जताई, वहीं विरोधी गुटों ने सड़कों पर पोस्टर लगाकर और नारेबाजी कर तीखा विरोध दर्ज कराया।

विधायक निधि को लेकर कमीशन मांगने का स्टिंग ने मचाई हलचल: साल के अंत में राजस्थान की सियासत उस समय गर्मा गई जब खींवसर से भाजपा विधायक रेवंतराम डांगा, हिंडौन से कांग्रेस की अनीता जाटव और बयाना (भरतपुर) से निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत का विधायक निधि को लेकर कमीशन मांगने का स्टिंग सामने आया। इस मामले में भाजपा जहां दो बार अपने विधायक डांगा को नोटिस दे चुकी है। तीनों विधायकों का यह मामला विधानसभा की सदाचार कमेटी को सौंपा जा चुका है। तीनों विधायक इस कमेटी के सामने पेश होकर अपनी बात रख चुके हैं।

साल 2025 राजस्थान के लिए सत्ता संघर्ष, प्रशासनिक टकराव और राजनीतिक विवादों का साल रहा।

ब्यूरोक्रेसी में अभूतपूर्व फैसले, विधानसभा में तीखे टकराव, चुनावी झटके और सरकार के भीतर उठे सवाल—इन सबने यह साफ कर दिया कि 2025 को राजस्थान की राजनीति और प्रशासन लंबे समय तक याद रखेंगे।


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