महिषी की ख्याति राज्य में ही नहीं दक्षिण भारत में भी फैला है: डॉ अर्पणा चौधरी | The Voice TV

Quote :

“स्वयं जैसे हो वैसे ही रहो; बाकी सब तो पहले से ही कोई और बन चुके हैं।” ― ऑस्कर वाइल्ड

National

महिषी की ख्याति राज्य में ही नहीं दक्षिण भारत में भी फैला है: डॉ अर्पणा चौधरी

Date : 31-Dec-2025

 सहरसा, 31 दिसंबर ।

स्वागत नए साल की और पिछले वर्ष की सुखद स्मृतियों के संग लोगों में अलग ही प्रकार का उत्साह नजर आ रहा है। बेचैनी नए साल में प्रवेश करने की, नई ऊर्जा के संग अधूरे कार्य को पूर्ण करने की और आने वाले भविष्य को बेहतर करने की बेताबी लोगों के आंखों में सहज ही देखा जा सकता है। ऐतिहासिकता और पुरातात्विक स्थलों के लिए देश दुनिया में विख्यात महिषी में नए साल में अनेकों परियोजनाएं के पूर्ण और प्रारंभ होने की आश आम लोगों के जेहन में है। मंडन धाम में पर्यटन विभाग द्वारा 14 करोड़ की ज़्यादा राशि से एक राष्ट्रीय स्तर का पर्यटक केंद्र बनाया जा रहा है।

इसमें 8वीं शताब्दी में हुए शंकराचार्य और मंडन मिश्र और उनकी धर्मपत्नी भारती के मध्य हुए शास्त्रार्थ को जीवन्त करने का प्रयास सरकार द्वारा किया जा रहा है। पिछले वर्ष ही तत्कालीन पर्यटन मंत्री नीतीश मिश्र द्वारा इस स्थल के विकास लिए तत्काल आवश्यक राशि निर्गत की गई थी। साथ ही विश्वप्रसिद्ध सिद्धपीठ श्री उग्रतारा स्थान के लिए भी इतनी राशि स्वीकृत की गई थी इस नए वर्ष में भी इसके लिए विकास की अलग ही रेखा दिखाई देगी। पर्यटन विभाग के द्वारा श्री उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव के मुख्य स्थल को राजकमल स्टेडियम के रूप में भवन निर्माण विभाग द्वारा कार्य प्रगति पर है।

जून महीने तक कार्य पूर्ण करा लिया जाएगा साथ ही इस स्टेडियम में रात में भी गतिविधि को अनवरत जारी रखने के लिए फ्लड लाइट लगाने की भी व्यवस्था की जा रही है।विगत वर्षों में महिषी में विभिन्न परियोजनाएं अलग अलग विभागों में विचाराधीन हैं जिस पर आम लोगों की नजरें लगी हुई है। नए साल और नई सरकार से एक विशेष प्रकार की आशा लगी हुई है। जिन परियोजना को तत्काल प्रारंभ करने की आवश्यकता है उसमें मंडन के नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर का दार्शनिक शोध केंद्र और पूर्वी कोशी रिवर फ्रंट प्रमुख रूप से शामिल है। साथ ही महिषी में एक बहुउद्देशीय संग्रहालय, प्रेक्षागृह यथाशीघ्र प्रारंभ करने की आवश्यकता है।

महिषी से मूल रूप से जुड़े कुछ प्रमुख हस्तियों ने अपने विचार इस पर साझा किए हैं।जिसमें डॉ बबल कांत झा, सीनियर साइंटिस्ट, क्लीवलैंड क्लीनिक फाउंडेशन, क्लीवलैंड, अमेरिका,जेएनयू, नई दिल्ली से बायो केमिस्ट्री में पीएचडी ने कहा कि इस क्षेत्र विशेष के लिए आवश्यक है महिषी में दर्शन, ज्ञान विज्ञान पर एक वृहत शोध हो जिसमें दुनिया के विषय विशेषज्ञ की सेवा लिया जाय। इसके लिए आवश्यक है इस स्थल पर एक वर्ल्ड स्टेंडर का रिसर्च सेंटर सरकार के सहयोग से स्थापित हो।


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload
Advertisement









Advertisement