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विक्रमादित्य सिंह ने किया सात पुस्तकों का विमोचन, पढ़ने की संस्कृति पर दिया जोर

Date : 02-Jan-2026

 शिमला, 02 जनवरी। शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर सभागार में साहित्य और संस्कृति से जुड़ा खास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सात पुस्तकों का लोकार्पण किया। लोकार्पित पुस्तकों में हिंदी के वरिष्ठ लेखक एस.आर. हरनोट की चर्चित कृतियां मंदिर और लोक श्रुतियां तथा कुन्जोम, सुदर्शन वशिष्ठ की किन्नर कैलाश से मणिमहेश, अजेय की रोहतांग आर-पार का तीसरा संस्करण, टाशी छेरिंग नेगी की किन्नौर, लाहौल के युवा लेखक छेप राम की संस्कृति के सात अध्याय और अखिलेश पाठक की देवभूमि की आत्मा शामिल रहीं।

इस अवसर पर विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि ये सभी पुस्तकें हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों किन्नौर, लाहौल और स्पीति के साथ-साथ प्रदेश के मंदिरों, लोक संस्कृति और परंपराओं पर आधारित हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उन्होंने लेखकों को बधाई देते हुए कहा कि साहित्यकार समाज का दर्पण होते हैं और उनकी रचनाओं के माध्यम से लोक भाषा, बोलियां, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक परंपराएं पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि सच्चे और ईमानदार लेखक ही इतिहास को उसके वास्तविक रूप में निडर होकर समाज के सामने लाने का काम करते हैं।

लोक निर्माण मंत्री ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे युवाओं का किताबें पढ़ने का रुझान कम हो रहा है, जबकि पुस्तकों से मिलने वाला गहरा ज्ञान और गंभीर सोच कहीं और से संभव नहीं है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि सोशल मीडिया का सीमित और रचनात्मक उपयोग करें और किताबों को नियमित रूप से पढ़ने की आदत बनाए रखें। विक्रमादित्य सिंह ने यह सुझाव भी दिया कि जयपुर और कसौली की तर्ज पर शिमला में भी साहित्य महोत्सव आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि हिमाचल की साहित्यिक संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।


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