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मन की शांति के लिए बुद्ध की शिक्षाएं, नैतिक आचरण महत्वपूर्ण है : प्रो. सिद्धार्थ

Date : 05-Jan-2026

 नई दिल्ली, 05 जनवरी । नालंदा स्थित नव नालंदा महाविहार (मानित विश्वविद्यालय),बिहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने सोमवार को कहा कि मन की शांति को बनाए रखने के लिए बुद्ध की शिक्षाएं, ज्ञान और नैतिक आचरण बहुत महत्वपूर्ण है।

प्रो. सिद्धार्थ ने यह बात नई दिल्ली स्थित राय पिथोरा सांस्कृतिक परिसर में "बौद्ध दर्शन" पर आयोजित एक पैनल चर्चा में कही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीते शनिवार को पवित्र पिपरावा अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया था। इस प्रदर्शनी का शीर्षक "प्रकाश और कमल: प्रबुद्ध व्यक्ति के अवशेष" है। यह प्रदर्शनी भारत की आध्यात्मिक आत्मा और वैश्विक विरासत की रक्षा के संकल्प को दर्शाती है।

प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि बुद्ध ने विश्व भर में संवाद की महत्ता, नैतिक आचरण और व्यक्तिगत शिक्षा पर जोर दिया, जो मन की शांति के लिए सबसे अहम है। आज के अनुयायियों को बुद्ध के अवशेष से यह प्रेरणा मिलती है कि वे उनकी शिक्षा उनके ज्ञान का निरंतर प्रचार प्रसार करते रहें। इन अवशेषों की वापसी एकता और सामंजस्य की भावना को दर्शाती है।

प्रो. नलिन कुमार शास्त्री ने कहा कि पिपरावा के अवशेषों की वापसी से पता चलता है कि बौद्ध विचार शांतिपूर्ण और एकजुट विकास के लिए आज भी कितने महत्वपूर्ण हैं। यह दर्शन प्राचीन होने के बावजूद ईमानदार शासन, पर्यावरण को बचाने और मन को शांत रखने जैसी आज की चिंताओं का समाधान देता है। यह भारत को बौद्ध धर्म की जन्मभूमि के रूप में फिर से स्थापित करता है और जोर देता है कि अनासक्ति, दयालुता और चीजों के एक-दूसरे पर निर्भर होने की शिक्षाएं ही सामाजिक भाईचारे तथा पूरी दुनिया के भले के लिए जरूरी हैं।

प्रो. बाला गणपति ने इस बात पर जोर दिया कि बौद्ध धर्म को पूरी दुनिया में इसलिए स्वीकार किया जाता है क्योंकि इसके विचार बहुत गहरे हैं और इसकी नैतिकता सबके लिए लागू होती है। बौद्ध दर्शन तेजी से खंडित हो रही दुनिया में शांति, सहअस्तित्व तथा नैतिक स्पष्टता के लिए एक व्यावहारिक और मानवीय ढांचा प्रदान करता है।

पैनल ने इस चर्चा को सांस्कृतिक संरक्षण, वैश्विक सद्भावना और शांति तथा साझा मानवीय मूल्यों के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

इस मौके पर नालंदा स्थित नव नालंदा महाविहार (मानित विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह, बाबासाहब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के पूर्व रजिस्ट्रार प्रो. नलिन कुमार शास्त्री, दिल्ली विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के प्रो. बाला गणपति, बाबासाहब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रो. आनंद सिंह, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के संस्कृत विभाग के प्रो. रजनीश मिश्रा और कलकत्ता विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. उज्ज्वल कुमार सहित कई प्रख्यात विद्वान मौजूद रहे।


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