अहमदाबाद में चारटोड़ा कब्रिस्तान की 300 कब्रों को स्थानांतरित करने काे नगर निगम का नोटिस | The Voice TV

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अहमदाबाद में चारटोड़ा कब्रिस्तान की 300 कब्रों को स्थानांतरित करने काे नगर निगम का नोटिस

Date : 08-Jan-2026

अहमदाबाद, 08 जनवरी। गुजरात के अहमदाबाद नगर निगम ने शहर स्थित चारटोड़ा कब्रिस्तान प्रबंधन को नोटिस जारी कर करीब 300 कब्रों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का करने के निर्देश दिए है।

नगर निगम के जारी नोटिस में कब्रिस्तान की चाहरदीवारी और कब्रों को हटाने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है। आरडीपी (रोड डेवलपमेंट प्लान) लागू किए जाने के बाद कब्रिस्तान की जमीन सड़क चौड़ीकरण की जद में आ गई है, जिससे वर्षों पुरानी कब्रों और धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

इसको लेकर गोमतीपुर इलाके में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अहमदाबाद नगर निगम के सड़क को 30.50 मीटर चौड़ा करने की योजना के तहत कब्रिस्तान की जमीन प्रभावित हो रही है। इसी को लेकर नगर निगम ने चारतोड़ा कब्रिस्तान प्रबंधन को नोटिस जारी कर करीब 300 कब्रों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं।

इस संबंध में गोमतीपुर क्षेत्र के पार्षद जुल्फिकार खान पठान ने 'हिंदुस्थान समाचार' बातचीत में बताया कि चारतोड़ा कब्रिस्तान में स्थित ‘दादी माई का रोज़ा’ नामक ऐतिहासिक दरगाह 600 वर्ष से अधिक पुरानी है। उन्होंने बताया कि जनवरी 2025 में गुजरात उच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने स्पष्ट रूप से कहा था कि कब्रिस्तान क्षेत्र में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। इसके अलावा यह जमीन वक्फ अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित है। इसे किसी भी व्यक्ति या प्राधिकरण को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।

पार्षद जुल्फिकार ने बताया कि गोमतीपुर में आरडीपी लागू होने के बाद तोड़फोड़ की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो अब कब्रिस्तान की चाहरदीवारी तक पहुंच गई है। कुछ दिन पहले अहमदाबाद सुन्नी मुस्लिम वक्फ कमेटी को धार्मिक दायित्व के नाम पर कब्रों को हटाने का नोटिस भेजा गया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने ईस्ट जोन के डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर से मुलाकात की थी, जिन्होंने आश्वासन दिया कि आगे की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

स्थानीय निवासी अयूब भाई ने बताया कि उन्हें हाल ही में पता चला है कि चारतोड़ा कब्रिस्तान की कब्रों को हटाने का नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा, “मेरे पिता की कब्र वर्ष 1997 से यहीं है। मेरे चाचा और उनके परिवार की कब्रें भी इसी कब्रिस्तान में हैं। हमारे पूरे परिवार की कब्रें यहीं दफन हैं। हम सरकार के विकास कार्यों का समर्थन करते हैं, लेकिन बिना कब्रें हटाए विकास होना चाहिए।”

इस मामले पर विपक्ष के नेता शहजाद खान पठान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “एक ओर अहमदाबाद नगर निगम शहर में लोगों के घर तोड़ रहा है और अब हालात ऐसे हो गए हैं कि मौत के बाद भी इंसान की कब्र सुरक्षित नहीं है। आरडीपी के नाम पर 600 साल पुरानी दरगाह और 283 कब्रों को हटाने का नोटिस जारी किया गया है, जो बेहद शर्मनाक है।”

इस संबंध में कांग्रेस पार्षदों और गोमतीपुर के स्थानीय लोगों ने अहमदाबाद म्युनिसिपल कमिश्नर को एक मांगपत्र सौंपा है, जिसमें मांग की गई है कि इस्लाम में कब्रों को हटाने की अनुमति नहीं है, इसलिए इस नोटिस को तत्काल रद्द किया जाए। पार्षदों का कहना है कि धार्मिक मुद्दों के नाम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है और नगर निगम को मंदिर, मस्जिद, कब्रिस्तान और श्मशान के बजाय बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए।

पार्षद इकबाल शेख ने भी हिंदुस्तान समाचार से बातचीत में बताया कि चारतोड़ा कब्रिस्तान लगभग 1,07,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और यह अहमदाबाद सुन्नी मुस्लिम वक्फ कमेटी के प्रबंधन में आता है। वर्ष 1944 में ब्रिटिश शासन के दौरान इसे आधिकारिक रूप से कब्रिस्तान के रूप में मान्यता दी गई थी।

उन्होंने कहा कि अहमदाबाद नगर निगम ने अब तक मुस्लिम समाज के लिए कोई वैकल्पिक कब्रिस्तान आवंटित नहीं किया है। निगम के नोटिस के अनुसार इस क्षेत्र में 286 कब्रों को गिराने की बात कही गई है। यह मामला पहले भी अदालत में जा चुका है, जहां सरकारी वकील ने कब्रों को न हटाने का भरोसा दिया था, जिसके बाद केस को निस्तारित कर दिया गया था। इसके बावजूद अब दोबारा सड़क चौड़ीकरण के नाम पर नोटिस जारी करना पूरी तरह अनुचित है।


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