वीबी जी-राम-जी योजना के नाम पर कांग्रेस जनता में भ्रम पैदा कर रही - डॉ. विजयशंकर मिश्रा | The Voice TV

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वीबी जी-राम-जी योजना के नाम पर कांग्रेस जनता में भ्रम पैदा कर रही - डॉ. विजयशंकर मिश्रा

Date : 08-Jan-2026

 रायपुर 08 जनवरी। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने कहा है कि कांग्रेस के पास आज कोई मुद्दा नहीं रह गया है, इसलिए वह लोक कल्याण तथा ग्रामीण विकास को सुनिश्चित करने वाली योजनाओं का विरोध करके अपनी राजनीतिक कुण्ठा का प्रदर्शन कर रही है। डॉ. मिश्रा ने छत्तीसगढ़ में 'विकसित भारत - जी राम जी अधिनियम 2025' को लेकर कांग्रेस के प्रस्तावित आंदोलन और कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि मुद्दों की कंगाली से जूझ रही कांग्रेस के नेता जनहितकारी योजनाओं को लेकर जनता को बरगलाने के बजाय कांग्रेस बचाओ अभियान चलाने में अपनी ऊर्जा लगाएँ। वीबी जी-राम-जी योजना के नाम पर कांग्रेस जनता में भ्रम पैदा कर रही है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मिश्रा ने आज गुरुवार को यहाँ एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में प्रेस ब्रीफ में पत्रकारों से चर्चा करते हुए वीबी - जी राम जी योजना के लाभ गिनाते हुए कहा कि यह योजना ऐतिहासिक, क्रांतिकारी और लोक कल्याण की दिशा में मील का पत्थर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीबों, मजदूरों के लिए समर्पित व प्रतिबद्ध होकर काम कर रही है। केंद्र सरकार द्वारा लाया गया 'विकसित भारत - गारंटी फॉर रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025' अब पूर्ववर्ती मनरेगा योजना का स्थान लेगा। डॉ. मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने की दिशा में यह अधिनियम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा। इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य गरीब, किसान और मजदूरों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।

इस नए अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर अब 125 दिन कर दिया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की वार्षिक आय में बड़ी वृद्धि सुनिश्चित होगी। मजदूरों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए इसमें यह प्रावधान किया गया है कि अब मजदूरी का भुगतान मात्र 7 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाएगा। यदि भुगतान में किसी भी प्रकार का विलंब होता है, तो मजदूर को मुआवजे के रूप में अतिरिक्त राशि प्रदान की जाएगी। इससे श्रमिकों के आर्थिक अधिकारों की रक्षा होगी और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।


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