रायपुर साहित्य उत्सव भव्य शुभारंभरायपुर, 23 जनवरी। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में आयाेजित रायपुर साहित्य उत्सव-2026 काे संवाद, काव्य और संस्कृति का संगम बताया।
उपसभापति हरिवंश नारायण शुक्रवार काे नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में साहित्य उत्सव-2026 के उद्घाटन समाराेह काे संबाेधित कर रहे थे।
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने साहित्य की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि साहित्य और रचनात्मकता का असली काम वहाँ उम्मीद (आशा) ढूँढना है जहाँ वह खोई हुई लगे। उन्होंने जोर दिया कि मनुष्य जिन पीड़ाओं से गुजरता है, उन पर नजर रखना और एक बेहतर भविष्य का सपना गढ़ने की ताकत देना ही साहित्य का मूल काम है। उन्होंने इस उत्सव को संवाद, काव्य और संस्कृति का संगम बताया और समाज को जोड़ने में साहित्य की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना का उल्लेख किया।
उपसभापति हरिवंश ने "देश पहले" की भावना पर बल देते हुए कहा कि वैचारिक विविधता के बावजूद राष्ट्र के निर्माण में एकजुटता आवश्यक है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध बौद्धिक और सांस्कृतिक परंपरा की सराहना की और इस बात पर खुशी जताई कि यह महोत्सव नई पीढ़ी को पढ़ने और सृजन करने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने उल्लेख किया कि यह आयोजन युवा पीढ़ी में अध्ययन, अभिव्यक्ति और सृजनशीलता के प्रति रुचि बढ़ाने में सहायक होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कर रहे थे। इस वर्ष की थीम "आदि से अनादि तक" रखी गई है। इस उत्सव में देशभर के लगभग 120साहित्यकार, लेखक और विचारक 42 विभिन्न सत्रों में हिस्सा ले रहे हैं।
उद्घाटन से पहले राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से राजधानी स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने उन्हें शॉल और प्रतीक चिन्ह नंदी भेंट कर आत्मीय स्वागत और सम्मान किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह उत्सव छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने इस उत्सव को समाज को जोड़ने में साहित्य की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत की सराहना की और इसे राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त प्रदर्शन बताया। उन्होंने उत्सव की थीम "आदि से अनादि तक" की सराहना करते हुए परंपराओं और समकालीनता के मेल को रेखांकित किया।
साय इस बात पर जोर दिया कि यह आयोजन न केवल प्रबुद्ध साहित्यकारों और विचारकों के संवाद का माध्यम बनेगा, बल्कि आम जनता और युवा पीढ़ी को भी साहित्य से गहराई से जोड़ने में सहायक होगा।
मुख्यमंत्री ने देशभर से जुटे लगभग 120 विद्वानों की उपस्थिति को राज्य के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण बताया और इसे छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष (25 वर्ष पूर्ण होने) का एक महत्वपूर्ण अध्याय करार दिया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ज्ञानपीठ पुरुस्कार से पुरुस्कृत प्रख्यात साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल का स्मरण किया और साहित्य में उनके योगदान की चर्चा की। उन्होंने बताया की जिस मंडप में यह उद्घाटन हुआ है, उसका नाम विनोद कुमार शुक्ल के नाम पर किया गया है। उन्हाेंने कहा कि यह उत्सव का समय है। हम लोग लगातार अपने प्रदेश में उत्सव मना रहे हैं। इसका श्रेय उन्हाेंने साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ला को दिया। उन्होंने आगे कहा कि सरल सहज व्यक्तित्व के धनी साहित्यकार विनोद कुमार ने छत्तीसगढ़ को वैश्विक पटल पर स्थान दिलाया है।
उद्घाटन समारोह से पहले ही साहित्य उत्सव स्थल पर उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला। बस्तर अंचल से पहुंचे आदिवासी कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में ढोल, मांदर और लोकगीतों के साथ नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। लोकनृत्य और जनजातीय गायन ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।
महोत्सव के पहले दिन प्रख्यात अभिनेता मनोज जोशी ने प्रसिद्ध नाटक 'चाणक्य' का मंचन मुख्य आकर्षणों में से एक है। साथ ही, यहाँ एक विशाल राष्ट्रीय पुस्तक मेला और पेंटिंग वर्कशॉप का भी आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम में राज्य के उपमुख्यमंत्री अरुण साव सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। यह उत्सव 23 से 25 जनवरी 2026 तक चलेगा। इसमें साहित्य, संस्कृति, राजनीति और समकालीन विषयों पर चर्चा के लिए 42 साहित्यिक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
