कोयंबटूर , 01 फरवरी । तमिलनाडु में आज से कड़े प्रतिबंधों के बीच वेल्लियंगिरी पर्वत की यात्रा प्रारंभ होगी। अदालत ने 30 जनवरी को पहली फरवरी से पर्वतारोहण की अनुमति का आदेश देते हुए कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। अब से पहले यह यात्रा आमतौर पर मार्च, अप्रैल और मई में होती रही है।
वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यात्रा के दौरान अदालत के आदेश में जारी प्रतिबंधों का हर हालत में पालन करना होगा। कोयंबटूर जिला वन अधिकारी ने बताया कि शारीरिक रूप से स्वस्थ श्रद्धालुओं को ही पर्वतारोहण की अनुमति होगी । श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्वत की तलहटी में एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई है। पर्वतारोहण से पहले श्रद्धालुओं को तलहटी में स्वास्थ्य परीक्षण कराना होगा।
कोयंबटूर जिला वन अधिकारी के अनुसार, तीसरे, छठे और सातवें पर्वत पर चिकित्सा शिविर लगाए जाएंगे। वन विभाग और अग्निशमन विभाग के कर्मचारी तलहटी में तैनात रहेंगे। पर्वत पर आठ कर्मचारी की निगरानी टीम गश्त करेगी। पिछले वर्ष पर्वतारोहण के दौरान नौ लोगों की मृत्यु हो गई थी। इसलिए इस बार यात्रा शुरू करने से पहले श्रद्धालुओं को सघन चिकित्सा जांच की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
उन्होंने बताया कि किसी को भी प्लास्टिक की कोई भी वस्तु ले जाने की इजाजत नहीं होगी। श्रद्धालु पर्वत पर नशीले पदार्थों का सेवन करते पाए गए तो कार्रवाई होगी। उल्लेखनीय है कि कोयंबटूर के पास पश्चिमी घाट की तलहटी में पूंडी वेल्लियंगिरी अंडवर मंदिर स्थित है। इसके निकट दक्षिण कैलाश के नाम से प्रसिद्ध वेल्लियंगिरी ईश्वर सातवें पर्वत पर स्वयंभू लिंग के रूप में विराजमान हैं।
यह मंदिर घने वन क्षेत्र में स्थित है। इस पर्वत तक पहुंचने के लिए घने जंगल और पहाड़ी रास्तों से होकर पैदल जाना पड़ता है। इसलिए बारिश और सर्दी के मौसम में यहां जाने की अनुमति नहीं होती। आमतौर पर केवल मार्च, अप्रैल और मई महीनों में ही अनुमति दी जाती है।
