जम्मू, 10 फ़रवरी।
आतंक और खेल साथ-साथ नहीं चल सकते, अगर पाकिस्तान के साथ मैच खेलने कोई मजबूरी है तो 140 करोड भारतीयों की राष्ट्र भावनाओं का सम्मान करते हुए हमारे खिलाड़ीयो पर हैंडशेक का दबाव न बनाया जाए यह कहना है शिवसेना (यूबीटी) जम्मू-कश्मीर ईकाई प्रमुख मनीश साहनी का।
टी20 विश्व कप के 15 फरवरी को होने जा रहे भारत-पाकिस्तान मैच पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिवसेना (यूबीटी) जम्मू-कश्मीर ईकाई प्रमुख मनीश साहनी ने कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का टी20 विश्व कप में भारत के साथ मैच के बहिष्कार का शोर मात्र एक 'गीदड़ भभकी' साबित हुआ है ।
उन्होंने कहा कि वह कतई इस पक्ष में नहीं है कि भारत किसी आतकवादी देश के साथ क्रिकेट व कोई भी खेल संबंध रखे। बीसीसीआई को कडा सक्षान लेने की जरूरत है। जब रंगभेद' जैसी सामाजिक बुराई के आधार पर दक्षिण अफ्रीका को 21 साल के लिए खेल जगत से बेदखल किया जा सकता है तो 'आतंकवाद'—जो सीधे तौर पर मानवता और जीवन के अधिकार पर हमला है और निश्चित रूप से उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध है । उन्होंने कहा कि आईसीसी का अंतकीस्तान ( पाकिस्तान) पर रहम समझ से परे है।
बीसीसीआई से कडा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान के विश्व क्रिकेट खेलने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर आवाज बुलंद करनी चाहिए । वही आईसीसी द्वारा बांग्लादेश का भारत में खेलने से मना करने के मनमाने फैसले पर भी कोई जुर्माना व प्रतिबंध नहीं लगाया है जिसपर बीसीसीआई को कडा एतराज दर्ज करना चाहिए।
