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मंत्रिमंडल की बैठक में छह महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए

Date : 11-Feb-2026

 देहरादून, 11 फरवरी । प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य की सामाजिक और प्रशासनिक सुधार पहलों को मजबूत बनाने के लिए छह महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक में ड्रग फ्री मुहिम को सशक्त करना, वन विभाग के दैनिक श्रमिकों का न्यूनतम वेतन तय करना, त्रईएसआई चिकित्सा ढांचे का विस्तार और सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना की अवधि बढ़ाना प्रमुख हैं।

बैठक के बाद सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में शैलेश बगोली ने कैबिनेट फैसलों की ब्रीफिंग की। केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की अवधि वित्तीय वर्ष 2025-26 तक बढ़ाए जाने के अनुरूप, राज्य स्तर पर भी मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की अवधि इसी वर्ष के अंत तक बढ़ाई गई। भविष्य में यदि केंद्र सरकार योजना की अवधि बढ़ाती है, तो राज्य स्तर पर इसे भी स्वतः लागू माना जाएगा।

राज्य मंत्रिमंडल ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को मजबूत करने के लिए राज्य मुख्यालय में 22 नए पद सृजित करने का निर्णय लिया। इसमें एक पुलिस उपाधीक्षक, दो ड्रग निरीक्षक, एक निरीक्षक, दो उपनिरीक्षक, चार मुख्य आरक्षी, आठ आरक्षी और दो आरक्षी चालक शामिल हैं। इस फोर्स का गठन 2022 में हुआ था और अब यह पूरी तरह स्वतंत्र ढांचे में काम करेगा।

मंत्रिमंडल ने वन विभाग और वन विकास निगम के 589 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को न्यूनतम 18 हजार रुपये वेतन देने का फैसला किया। विभाग में कुल 893 दैनिक श्रमिक हैं, जिनमें से 304 पहले से न्यूनतम वेतन का लाभ ले रहे थे। कर्मचारी राज्य बीमा योजना के अंतर्गत चिकित्सा सेवा संवर्ग के पदों का विस्तार किया गया। नई नियमावली 'उत्तराखंड कर्मचारी राज्य बीमा योजना, श्रम चिकित्सा सेवा नियमावली, 2026' के तहत कुल 94 पद होंगे। जिनमें 76 चिकित्सा अधिकारी, 11 सहायक निदेशक, 06 संयुक्त निदेशक और 1 अपर निदेशक शामिल है। इससे पहले केवल 14 पद थे।

उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रारूपण को भी मंजूरी दी। इसमें “आदतन अपराधी” की परिभाषा को उच्च न्यायालय के निर्देशों और राज्य विधानमंडल के कानून के अनुरूप संशोधित किया जाएगा। कोविड-19 महामारी के दौरान लागू बोनस संदाय (उत्तराखंड संशोधन) विधेयक, 2020 को वर्तमान परिस्थितियों में लागू न होने और राष्ट्रपति की अनुमति न मिलने के कारण यथास्थिति में विधान सभा से वापस लेने का निर्णय लिया गया।


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