मेदिनीपुर, 14 मार्च ।
पश्चिम बंगाल के महत्वपूर्ण राजनीतिक जिलों में शामिल पश्चिम मिदनापुर की 19 विधानसभा सीटों पर आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज होती दिख रही है। जिले की अधिकांश सीटों पर मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच माना जाता है, जबकि कुछ क्षेत्रों में वाम दल भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश करते हैं। कांग्रेस किसी भी क्षेत्र में कोई विशेष प्रभाव डालने में सक्षम नहीं दिख रही है।
2021 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार जिले में लगभग 45 लाख से अधिक मतदाता हैं और मतदान प्रतिशत करीब 88 प्रतिशत दर्ज किया गया था। जिले में कुल 19 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें 13 सामान्य, तीन अनुसूचित जाति तथा तीन अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।
जंगलमहल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नयाग्राम, गोपीबल्लभपुर, झाड़ग्राम और बिनपुर जैसे क्षेत्रों में आदिवासी मतदाताओं का प्रभाव अधिक है। इन क्षेत्रों में विकास, सड़क, सुरक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे चुनावी राजनीति को प्रभावित करते हैं।
दूसरी ओर गड़बेता, सालबोनी और केशपुर जैसे क्षेत्र पहले वामपंथी राजनीति के मजबूत केंद्र माने जाते थे, लेकिन वर्तमान समय में यहां तृणमूल कांग्रेस का प्रभाव अधिक दिखाई देता है। हालांकि इन क्षेत्रों में विपक्ष में मुख्यतः भाजपा भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटा हुआ है।
जिले के शहरी क्षेत्रों में शामिल मेदिनीपुर और खड़गपुर सदर विधानसभा सीटों पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है। 2021 के चुनाव में खड़गपुर सदर सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी, जिसके बाद यह सीट राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार जिले की कुछ सीटें आगामी चुनाव में बेहद प्रतिस्पर्धी हो सकती हैं। चुनाव विश्लेषक संजय दास ने कहा कि, “पश्चिम मेदिनीपुर की कुछ सीटें आगामी चुनाव में बेहद निर्णायक साबित हो सकती हैं। इनमें खड़गपुर, घाटाल, दांतन और नारायणगढ़ विधानसभा क्षेत्र प्रमुख हैं।”
इन सीटों पर पिछले चुनाव में जीत का अंतर अपेक्षाकृत कम रहा था, जिसके कारण आगामी चुनाव में यहां कड़ा मुकाबला होने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिले की कई सीटों पर ग्रामीण और शहरी मतदाताओं के अलग-अलग मुद्दे चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। वरिष्ठ पत्रकार राकेश कुमार ने कहा कि जिले की कई सीटों पर तृणमूल और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
