वाराणसी, 13 मार्च । वासंतिक चैत्र नवरात्र में काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ की नगरी शक्ति आराधना में लीन रहेगी । स्वयं काशीपुराधिपति (श्री काशी विश्वनाथ) के दरबार में पूरे नवरात्र विविध धार्मिक अनुष्ठान होंगे। नवरात्र के पहले दिन श्री काशी विश्वनाथ धाम में कलश स्थापित होगा।
मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. विश्वभूषण मिश्र ने शुक्रवार को बताया कि चैत्र नवरात्र पर्व (19 मार्च) की पूर्व संध्या पर शक्तिपीठ मां विशालाक्षी मंदिर से आए नौ कलश गंगाजल श्री काशी विश्वनाथ के पावन ज्योर्तिलिंग पर अर्पित किया जाएगा। अगले दिवस प्रातःकाल मंगला आरती के पश्चात, सर्वप्रथम प्रथम शक्तिपीठ माता काशी विशालाक्षी द्वारा प्रेषित नौ कलश गंगाजल से महादेव का जलाभिषेक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में प्रतिदिन भगवान श्री विश्वेश्वर दरबार से श्रृंगार सामग्री तथा वस्त्र माता विशालाक्षी को भेंट स्वरूप प्रेषित किए जाएंगे। माता काशी विशालाक्षी शक्तिपीठ के साथ-साथ काशी में स्थित नवदुर्गा स्वरूप देवियों को भी प्रतिदिन के अनुसार श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग धाम से वस्त्र एवं श्रृंगार सामग्री अर्पित की जाएगी।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ के अनुसार, चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में प्रतिदिन धाम स्थित शिवार्चनम मंच पर सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा। प्रतिदिन श्री काशी विश्वनाथ धाम में शक्ति आराधना के अंतर्गत दुर्गासप्तशती का शास्त्रीय विधि-विधान से पाठ संपन्न किया जाएगा। चैत्र नवरात्र पर्व अवधि में एक दिवस काशी की परंपरा के अनुसार माता श्रृंगार गौरी की आराधना को समर्पित रहेगा। इसी परंपरा के निर्वहन में काशी विश्वनाथ धाम में विराजमान माता श्रृंगार गौरी की आराधना काशीवासी एवं श्रद्धालुओं द्वारा की जाएगी। मंदिर न्यास द्वारा इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए नारियल तथा फलाहारी प्रसाद की व्यवस्था की जाएगी और आयोजन गरिमापूर्ण रूप से संपन्न किया जाएगा। राम नवमी के पावन अवसर पर अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया जाएगा। नवमी तिथि को नौ मातृ शक्तियों को मुख्य याजक के रूप में आमंत्रित कर नवमी यज्ञ संपन्न कराया जाएगा।
