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हिमाचल विधानसभा : सत्ता पक्ष ने गिनाईं बजट की उपलब्धियां, विपक्ष ने बताया कमजोर बजट

Date : 24-Mar-2026

 शिमला, 24 मार्च। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में वित्त वर्ष 2026–27 के बजट अनुमानों पर जारी सामान्य चर्चा के दौरान मंगलवार को भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सत्ता पक्ष के विधायकों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के बजट को सीमित संसाधनों के बावजूद जनहित में बताया, जबकि विपक्ष ने इसे पिछले बजट से छोटा और कर्ज बढ़ाने वाला बजट करार दिया।

कांग्रेस विधायक संजय अवस्थी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों में भयंकर प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ राजनीतिक चुनौतियों का भी सामना किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार से प्रदेश को अपेक्षित सहायता नहीं मिली और आरडीजी (राजस्व घाटा अनुदान) में कटौती का असर मुख्यमंत्री के चौथे बजट में साफ दिखाई देता है। उनके अनुसार आरडीजी बंद होने के कारण ही बजट का आकार कम हुआ है। अवस्थी ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए विशेष पैकेज जारी किया और हर प्रभावित परिवार तक मदद पहुंचाने का प्रयास किया।

उन्होंने यह भी कहा कि जब प्राकृतिक आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का प्रस्ताव लाया गया तो विपक्ष ने सहयोग नहीं किया। अवस्थी ने पूर्व भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि केंद्र से लगभग 70 हजार करोड़ रुपये मिलने के बावजूद न तो कर्ज कम किया गया और न ही कर्मचारियों की देनदारियां चुकाई गईं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपये की सहायता राशि भी अभी तक प्रदेश को नहीं मिली है। इसके अलावा बीबीएमबी का एरियर 14 वर्षों से लंबित है और सेब पर आयात शुल्क कम किए जाने से प्रदेश के बागवानों को नुकसान हुआ है।

वहीं भाजपा विधायक प्रकाश राणा ने बजट को लेकर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में छोटा है और इसमें विधायक निधि तथा कर्मचारियों के वेतन में कटौती की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कर्ज लगातार बढ़ रहा है और इसे नियंत्रित करने के लिए नियम बनाए जाने चाहिए कि लिया गया कर्ज पांच वर्षों के भीतर चुकाया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में कर्ज सबसे ज्यादा बढ़ा है और यदि इस पर रोक नहीं लगी तो भविष्य में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

कांग्रेस विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने कहा कि एक-दूसरे पर आरोप लगाने से समस्याओं का समाधान नहीं होता। उन्होंने कहा कि यदि पूर्व सरकार ने अच्छा काम किया होता तो वह सत्ता से बाहर नहीं होती। उनके अनुसार मुख्यमंत्री सुक्खू ने कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर बजट पेश किया है और विपक्ष को बजट की सकारात्मक बातों का भी उल्लेख करना चाहिए।

भाजपा विधायक विनोद कुमार ने सरकार से सवाल किया कि पिछले तीन वर्षों में कितने डे-बोर्डिंग स्कूल शुरू किए गए हैं। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में पीलिया फैलने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग में पिछली सरकार के दौरान महत्वपूर्ण काम हुए थे और वर्तमान में स्कूलों में कमरे तक उपलब्ध नहीं हैं, जबकि सरकार स्विमिंग पूल बनाने की बात कर रही है।

कांग्रेस विधायक विवेक शर्मा ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद बजट में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का विशेष ध्यान रखा गया है और समाज के सभी वर्गों के लिए कुछ न कुछ प्रावधान किए गए हैं।

भाजपा विधायक डॉ. जनक राज ने आरोप लगाया कि सरकार जनजातीय क्षेत्रों की अनदेखी कर रही है और बजट में जनजातीय क्षेत्रों के लिए कोई विशेष योजना नहीं रखी गई है। उन्होंने अपने क्षेत्र के अस्पतालों में डॉक्टरों के खाली पदों का मुद्दा भी उठाया और कहा कि प्रदेश में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

कांग्रेस विधायक सुरेश कुमार ने कहा कि बजट में समाज के हर वर्ग का ध्यान रखा गया है और मुख्यमंत्री व्यवस्था परिवर्तन के जरिए प्रदेश को विकास की दिशा में आगे ले जाने का प्रयास कर रहे हैं।

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने चर्चा के दौरान कहा कि विधायक प्रकाश राणा ने कुछ सकारात्मक सुझाव दिए हैं, जिन पर सरकार विचार करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और चर्चा के दौरान सनसनी फैलाने के प्रयास नहीं होने चाहिए।


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