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आसनसोल : पूजा पर प्रतिबंध को दरकिनार कर लोगों ने खोले दुर्गा मंदिर के कपाट, शुरू हुई नियमित आराधना

Date : 06-May-2026

 कोलकाता, 06 मई।

पश्चिम बंगाल के आसनसोल से एक अनोखा और लंबे समय से विवादों में घिरा मामला सामने आया है, जहां 75 वर्षों से चली आ रही दुर्गा पूजा की परंपरा मंदिर निर्माण के बाद ही प्रतिबंधों में जकड़ गई थी। जिस स्थान पर दशकों से नियमित पूजा-अर्चना होती रही, वहीं मंदिर बनने के बाद पूजा पर रोक लगा दी गई और साल में केवल तीन अवसर—दुर्गा पूजा, काली पूजा और लक्ष्मी पूजा—पर ही मंदिर के द्वार खोलने की अनुमति दी गई।

इस पूरे विवाद की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई जब करीब साढ़े तीन कट्ठा जमीन 45 लाख रुपये में मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई। जमीन का रजिस्ट्रेशन मंदिर ट्रस्ट के नाम पर कराया गया और सभी सरकारी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 2012-13 में मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ, हालांकि यह आज तक पूरी तरह से तैयार नहीं हो सका है। निर्माण शुरू होते ही कुछ लोगों ने यहां नियमित पूजा का विरोध किया, जिसके बाद मामला प्रशासन तक पहुंचा और हस्तक्षेप हुआ।

बताया जाता है कि तत्कालीन अतिरिक्त जिला अधिकारी की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि मंदिर में सीमित अवसरों पर ही पूजा की अनुमति होगी। बाद में मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा, जहां प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में आशंका जताई कि यदि नियमित पूजा की अनुमति दी गई तो कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। इसके बाद से मामला लंबित है और मंदिर अधिकांश समय बंद ही रहा, जिससे स्थानीय लोगों में निराशा बनी रही।

करीब 14 से 15 वर्षों तक मंदिर बंद रहने के बाद सोमवार रात हालात ने अचानक नया मोड़ ले लिया। सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और बंद ताला तोड़कर अंदर प्रवेश कर गए। “जय श्री राम” के नारों के बीच मंदिर के द्वार खोल दिए गए। मंगलवार सुबह स्थानीय लोगों ने मंदिर की साफ-सफाई कर विधिवत पूजा-अर्चना शुरू कर दी, जिसके बाद पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बन गया।

स्थानीय लोगों का मानना है कि हालिया राजनीतिक बदलाव के बाद यह संभव हो पाया है। क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर विजयी उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी को इसका श्रेय दिया जा रहा है। लोगों के अनुसार उन्होंने चुनाव के दौरान वादा किया था कि मंदिर का द्वार खोला जाएगा और अब वह वादा पूरा होता दिखाई दे रहा है।

मंदिर से जुड़े ट्रस्टी संजय अग्रवाल का कहना है कि जब तक प्रशासन की ओर से कोई लिखित आदेश नहीं मिलता, तब तक वे औपचारिक रूप से मंदिर का संचालन अपने हाथ में नहीं लेंगे। हालांकि उन्होंने इसे सनातन आस्था की जीत बताया और कहा कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

मंदिर खुलने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्षों तक वे मंदिर के बाहर से ही प्रणाम कर लौट जाते थे, लेकिन अब मंदिर के खुलने से उनकी आस्था को नया बल मिला है। कई लोगों ने इसे लंबे इंतजार के बाद मिली खुशी बताया, वहीं एक बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा कि अगर उनके पिता आज जीवित होते तो यह दिन देखकर बेहद खुश होते।

फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और प्रशासनिक आदेश का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे में मंदिर का भविष्य पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा, लेकिन वर्षों से बंद पड़े इस मंदिर के खुलने से आसनसोल में खुशी और उत्साह की लहर साफ तौर पर देखी जा रही है।


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