प्रधानमंत्री ने ज्योतिरादित्य सिंधिया का लेख किया साझा, सिक्किम की सांस्कृतिक विरासत और विकास मॉडल को सराहा | The Voice TV

Quote :

"अगर आप वो पाना चाहते हैं जो आपने कभी नहीं पाया, तो आपको वो करना होगा जो आपने कभी नहीं किया।" — स्टीव जॉब्स

National

प्रधानमंत्री ने ज्योतिरादित्य सिंधिया का लेख किया साझा, सिक्किम की सांस्कृतिक विरासत और विकास मॉडल को सराहा

Date : 24-May-2026

 नई दिल्ली, 24 मई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिक्किम के राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा करते हुए राज्य की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास मॉडल की प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि लेख में कंचनजंगा को सिक्किम की भूमि, स्मृति और चेतना का संरक्षक बताया गया है, जो राज्य के “विकसित सिक्किम-2047” के विजन को दिशा देता है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि सिक्किम अपने राज्यत्व के 51वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस अवसर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कंचनजंगा की पांच धरोहरों के माध्यम से राज्य की पहचान, परंपरा और विकास यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि ये पांच धरोहरें “विकसित सिक्किम-2047” की दिशा में राज्य की प्रगति को प्रकाशित कर रही हैं।

एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित अपने लेख में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सिक्किम को सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और सतत विकास का आदर्श उदाहरण बताया। उन्होंने लिखा कि राज्य का विकास केवल आधारभूत संरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनता के विश्वास, प्रकृति के संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ा है।

सिंधिया ने अपने लेख में कंचनजंगा को सिक्किम की आत्मा करार देते हुए कहा कि हिमालय की गोद में स्थित यह पर्वत केवल भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि राज्य की सामूहिक चेतना, आस्था और परंपराओं का प्रतीक है। उन्होंने कंचनजंगा से जुड़ी पांच धरोहरों सोना, चांदी, रत्न, अन्न और पवित्र ग्रंथ का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सिक्किम की समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करती हैं।

लेख में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सिक्किम भारत का पहला पूर्ण जैविक राज्य है, जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का अनूठा मॉडल देखने को मिलता है। सिंधिया ने राज्य में स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खेती और टिकाऊ पर्यटन को भविष्य के विकास की आधारशिला बताया।

उन्होंने कहा कि सिक्किम में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी के साथ विकास कार्यों को आगे बढ़ाया गया है। सड़क, डिजिटल संपर्क और पर्यटन अवसंरचना के विस्तार के बावजूद पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने का निरंतर प्रयास किया गया है। लेख में सिक्किम की सांस्कृतिक विविधता, बौद्ध मठों, स्थानीय परंपराओं और सामाजिक समरसता की भी विस्तार से चर्चा की गई है।

सिंधिया ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में सिक्किम हरित विकास, ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था और सतत पर्यटन के क्षेत्र में पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है। उन्होंने कहा कि सिक्किम की विकास यात्रा आधुनिकता और परंपरा के संतुलन का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है।


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload
Advertisement









Advertisement