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प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले पूरा होगा जीई के फाइटर जेट इंजन निर्माण का सौदा

Date : 29-May-2023

 नई दिल्ली, 29 मई । भारत में फाइटर जेट इंजन बनाने की जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) की योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कई अरब डॉलर का यह सौदा इस सप्ताह अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन की भारत यात्रा के दौरान पूरा होने की संभावना है। ऑस्टिन की नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के दौरान 30 एमक्यू-9बी सशस्त्र ड्रोन खरीदने के सौदे पर भी हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

अमेरिकी रक्षा सचिव ऑस्टिन लॉयड इस सप्ताह भारत की यात्रा पर नई दिल्ली आएंगे। जनवरी, 2021 में कार्यभार संभालने के बाद से यह ऑस्टिन की भारत की दूसरी यात्रा होगी। अपनी भारत यात्रा के दौरान ऑस्टिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य नेताओं से मिलेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के दौरान दोनों पक्ष जून में पीएम मोदी की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा से पहले लंबित सौदों को अंतिम रूप देंगे। शीर्ष स्तर के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि वे 'एयर इंफॉर्मेशन शेयरिंग' समझौते के जल्द निष्कर्ष पर भी चर्चा कर सकते हैं।

ओहियो स्थित जीई की सहायक कंपनी जीई एयरोस्पेस भारत में फाइटर जेट इंजन बनाने की प्रौद्योगिकी विकसित करने की योजना पर भारत के साथ एक साल से अधिक समय से चर्चा कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी की 21 से 24 जून तक अमेरिका की आधिकारिक राजकीय यात्रा प्रस्तावित है, जहां उनकी मेजबानी व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति जो बाइडेन करेंगे। फाइटर जेट इंजन सौदे की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी की अगले महीने अमेरिका की राजकीय यात्रा के दौरान की जा सकती है।

दरअसल, इस साल जनवरी में व्हाइट हाउस को भारत में संयुक्त रूप से इंजन बनाने के लिए जीई से एक आवेदन मिला है। वाशिंगटन डीसी में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके अमेरिकी समकक्ष जेक सुलिवन पहले दौर की वार्ता कर चुके हैं। भारत में जीई के एफ-414 जेट इंजनों का निर्माण सरकार की 'आत्मनिर्भर योजना' के तहत स्वदेशी लड़ाकू विमान लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) मार्क-2 की ताकत बढ़ाने के लिए है। एलसीए मार्क-1 जीई कंपनी के एफ-404 इंजन से ही संचालित हैं।

अब एलसीए मार्क-2 के लिए भारत में ही जीई के एफ-414 जेट इंजनों के साथ भारत की विदेशी निर्माताओं के साथ मिलकर 114 मल्टीरोल फाइटर जेट विकसित करने की भी योजना है। अमेरिका भी भारत के साथ जेट इंजन प्रौद्योगिकी के पूर्ण हस्तांतरण के लिए तैयार है। इसकी घोषणा अमेरिकी वायु सेना के सचिव फ्रैंक केंडल ने इसी साल मार्च में अपनी भारत यात्रा के दौरान एनएसए डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के दौरान की थी।

भारत ने चीन के साथ-साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने और निगरानी को बढ़ावा देने के लिए सेना, नौसेना और वायु सेना ने एमक्यू-9बी सशस्त्र ड्रोन की जरूरत जताई है। खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहती है। इसलिए ऑस्टिन की यात्रा के दौरान 30 एमक्यू-9बी सशस्त्र ड्रोन खरीदने के सौदे पर भी हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इस ड्रोन के आने के बाद हिंद महासागर पर चीन के खिलाफ घेराबंदी और मजबूत हो सकेगी। अगर यह डील फाइनल हो जाती है तो भारत और अमेरिका के रिश्तों में यह एक मील का पत्थर होगी।


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