कृषि-जैव विविधता का संरक्षण इको सिस्टम के लिए जरूरी : तोमर | The Voice TV

Quote :

असफलताओं के बावजूद, अपना मनोबल ऊँचा रखें. अंत में सफलता आपको अवश्य मिलेगी । “ - धीरूभाई अंबानी

National

कृषि-जैव विविधता का संरक्षण इको सिस्टम के लिए जरूरी : तोमर

Date : 12-Sep-2023

 नई दिल्ली, 12 सितंबर । केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि कृषि-जैव विविधता संरक्षण सिर्फ कर्तव्य नहीं है, बल्कि इको सिस्टम के अस्तित्व के लिए आवश्यकता है। भारत सरकार इस उद्देश्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है।

तोमर ने मंगलवार को किसानों के अधिकारों को लेकर पूसा में आयोजित चार दिवसीय संगोष्ठी के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत इस अंतरराष्ट्रीय संधि (आईटीपीजीआरएफए) के तहत सहमत सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रहा है व इसके अक्षरश: पालन में विश्व में सर्वोपरि कार्य कर रहा है।

तोमर ने खाद्य एवं कृषि के लिए पादप आनुवांशिक संसाधनों पर अंतरराष्ट्रीय संधि (आईटीपीजीआरएफए), खाद्य व कृषि संगठन (एफएओ), रोम एवं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित इस वैश्विक संगोष्ठी में कहा कि यह तथ्य, भारतीय संसद द्वारा पौधों की विविधता व किसानों के अधिकार संरक्षण अधिनियम-2001 के रूप में अधिनियमित राष्ट्रीय कानून से बहुत स्पष्ट रूप से रेखांकित है। इस कानून के अधिनियमन के बाद से भारत सरकार ने कानून में किए प्रावधानों के अनुरूप इसका पालन सुनिश्चित करने के लिए पूरी शिद्दत के साथ काम किया है। उन्होंने कहा कि भारत के पौधा किस्म संरक्षण ढांचे की विशेषताओं में से एक, इसका किसानों के अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करना है। यह अधिनियम किसानों की पीढ़ियों के अनवरत प्रयासों से पौधों के आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण व विकास में किसानों की अमूल्य भूमिका को मान्यता देता है। यह एक्ट किसानों को खेत में बचाए गए बीजों के संरक्षण, उपयोग करने, आपस में बांटने, साझा करने व बेचने का अधिकार देता है। यह प्रावधान किसानों को स्थानीय ज्ञान व नवाचार को बढ़ावा देते हुए उनकी स्वायत्तता संरक्षित करते हुए कृषि मूल्य श्रृंखला में सक्रिय रूप से भाग लेने का अधिकार देता है।

उन्होंने कहा कि हमारी समृद्ध कृषि विरासत, किसानों के प्रयासों के कारण फली-फूली है, जिन्होंने कई पौधों की किस्मों का पोषण व विकास किया है। ये किस्में न केवल जीविका स्रोत हैं बल्कि प्रकृति और संस्कृति के बीच गहरे संबंध का जीवंत प्रमाण हैं।


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload









Advertisement