मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाला त्यौहार है , यह एकादशी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है | इस एकादशी में व्यक्ति को सांसारिक मोह के बंधन से मुक्ति और पितरों को मोक्ष को दिलाने के लिए होती है | मोक्षदा एकादशी को गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है |
पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार वैखानस नामक राजा का शासन था | राजा अपने प्रजा को अपने संतान के तरह उनका ध्यान रखते थे | नगर के लोग राजा के इस न्याय व्यवस्था से प्रसन्न रहते थी | एक बार जब राजा ने अपने सपने में उनके पिता जी को नरक का कष्ट भोगते हुए देखते है तो , उनको बहुत दुख हुआ | सुबह होते ही उन्होंने दरबार में विद्वानों को बुलवाया और सारी वृतात उनको बताया |
राजा ने बताया कि उनके पिता जी नरक में है और भिन्न-भिन्न प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ रहा है | उन्होंने कहा की तुम मुझे इस नरक से मुक्ति दिलाओ | राजा ने कहा कि जब से वह स्वप्न देखा है वह बहुत अधिक परेशान है | राजा ने विद्वानों से कहा कि वह कैसे नरक के अपने पिता को मुक्ति दिलाएं अतः आप मुझे इस समस्या का कोई उपाय बताइये |
राजा की बाते सुनने के बाद सभी विद्वानों ने कहा कि यहाँ से कुछ दूर पर ही पर्वत ऋषि का आश्रम है , वे त्रिकालदर्शी है | उनके पास इस समस्या का समाधान अवश्य होगा | राजा अगले दिन पर्वत ऋषि के आश्रम में पहुंचे और पर्वत ऋषि को प्रणाम
किया तब ऋषि ने राजा को उनके आने का कारण पूछा | राजा ने ऋषि को अपने सारी बात पर्वत ऋषि को बताई |
पर्वत ऋषि राजा की सारी बात सुन वह अपने तपोबल से उनके पिता जी के पूरे जीवनकाल को देखा | तब ऋषि राजा को बताते है कि उनके पिता जी पुनर्जन्म में बहुत पाप किये है जिसके लिए उनको अपने बुरे कर्म का फल नरक में भोगना पड़ रहा है | ऋषि की सारी बाते सुनकर राजा ने उनको उसका उपाय पूछा ऋषि ने राजा को मोक्षदा एकादशी व्रत को विधिपूर्वक करो और उसके पुण्य फल को अपने पिता के नाम से संकल्प कर दो तुम्हारे पिता नरक से मुक्त हो जाएंगे |
जब मोक्षदा एकादशी आई तो राजा ने विधिपूर्वक व्रत और पूजन किया| फिर बताए अनुसार उसके पुण्य फल को पिता के नाम से संकल्प करा दिया | उस पुण्य फल के प्रभाव से वे मुक्त हो गए| उन्होंने अपने पुत्र से कहा कि तुम्हारा कल्याण हो| इसके बाद वे स्वर्ग चले गए. जो भी इस व्रत को करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है|
