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वर्तमान युवा पीढ़ी भी करे कार सेवा

Date : 03-Jan-2024

 22 जनवरी 2024 के दिन अयोध्या में बन रहे भव्य मंदिर में प्रभु श्री राम अपने सभी स्वरूपों में स्थापित होने वाले हैं। 500 वर्षो के अथक संघर्ष के बाद यह अवसर आया हैं, जब अयोध्या में प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर पुनः स्थापित हो रहा है। जिसका उत्साह भारत ही नहीं विश्व के कोने-कोने में दिखाई दे रहा हैं। 


स्वतंत्रता के बाद श्री राम मंदिर आंदोलन के चलते 80 और 90 के दशक के सभी लोगो को मंदिर निर्माण के आंदोलन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ने का अवसर भी मिला। और एक समय यह भी आया जब भारत की धरती पर लगे कलंक को हमेशा के लिए मिटा दिया गया। उसके बाद भी पुनः भव्य मंदिर निर्माण का संघर्ष बहुत लम्बा चला और वर्षो की सतत न्याय प्रक्रिया के बाद भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। 

किन्तु 90 के दशक के बाद दो ऐसी पीढ़ी हैं, जो 500 वर्ष के राम मंदिर आंदोलन से अनभिज्ञ हैं। जिसने उस संघर्ष को केवल पढ़ा और सुना हैं। ऐसे में उस युवा पीढ़ी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी क्या हो सकती हैं कि वह वर्तमान युवा पीढ़ी भी अपने समय और परिस्थितियों के अनुसार कार सेवा को कर सके?

90 के दशक के बाद भारत में जन्म लेने वाली पीढ़ी की मानसिक स्थिति बिलकुल वैसी ही हैं। जैसी मानसिक स्थिति 500 वर्ष पूर्व उस पीढ़ी की रही होगी, जिसके सामने अपने आराध्य के विशाल मंदिर को विधर्मियो के द्वारा जबरदस्ती ढ़हा दिया गया और वह पीढ़ी असहाय होकर सब देखती रही। 

किन्तु उस पीढ़ी के अंतर्मन के भीतर मंदिर के रूप में धर्म की पुनर्स्थापना को लेकर जो संकल्प जागृत हुआ होगा, जिसके परिणाम स्वरुप 500 वर्षो के बाद हम वर्तमान में भव्य मंदिर निर्माण के रूप में देख रहे हैं। उसी दृढ विश्वास के साथ वर्तमान युवा पीढ़ी को भी आनेवाले हजारो वर्षो तक उसी धर्म स्थापना के संकल्प को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता होगी। 

जिससे आगे आने वाले हजारो वर्षो तक कोई विधर्मी हमारे आराध्य के किसी भी स्थल को क्षति पहुंचाने का कुंठित साहस ना कर सके। वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए यही शास्वत कार सेवा होगी।

कार सेवा, निर्माण के साथ-साथ निरंतर कार्य को करने की भी हो सकती हैं। 90 के दशक के बाद में जन्मे युवाओ के लिए यह सबसे बड़ी जिम्मेदारी का कार्य इसी पीढ़ी के जिम्मे भी हैं। वर्तमान युवा पीढ़ी को संपूर्ण समाज को यह विश्वास दिलाने की आवश्यकता हैं कि वर्तमान से लेकर आने वाली सभी पीढ़ी को यह सन्देश देना हैं कि विपरीत परिस्थितियो के चलते जो भूल 500 वर्ष पूर्व समाज से हो गयी थी, उसकी पुनरावृत्ति आगे आने वाले हजारो वर्षो तक ना होने पाए और समाज को जागृत करने के साथ-साथ समाज को सही दिशा में लेकर जाना और भारत के विचार को संपूर्ण विश्व तक पहुंचाते हुए कार सेवा के रूप में विश्व का मार्ग दर्शन करना। 

लेखक - सनी राजपूत, अधिवक्ता, उज्जैन
मोबाइल - 9926387085 
ईमेल - [email protected]

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