20 मई 1932 सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी विपिन चंद्र पाल का निधन Date : 20-May-2024 भारतीय स्वाधीनता संग्राम में दो प्रकार की विभूतियाँ हुईं हैं । एक वे जिन्होंने स्वयं संघर्ष किया और बलिदान दिया एवं दूसरे वे जिन्होंने स्वयं तो संघर्ष किया ही साथ ही क्रांतिकारियों की एक पूरी पीढ़ी तैयार की । सुविख्यात क्राँतिकारी विभूति विपिन चंद्र पाल ऐसे ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी है जिन्होंने बंगाल में स्वाधीनता संग्राम की गति तेज की और स्वयं भी तीखा संघर्ष किया । उन दिनों कांग्रेस और अन्य संस्थाओं में भारतीय जनों में स्वत्व जगाने की बात तो आ गई थी और गीत वंदेमातरम भी सार्वजनिक रूप से गाया जाने लगा था । फिर भी सारा जोर नागरिक अधिकार और समानता के व्यवहार पर था । और जब क्राँतिकारियों के शस्त्र गरजने लगे तो अहिसंक आँदोलन कारियों ने थोड़ी दूरी बनाई । तभी अंग्रेजों ने 1905 में बंगाल विभाजन का निर्णय लिया । तब दोनों धाराएँ समीप आईं। इसके अग्रणी नेताओं में विपिन चंद्र पाल हैं । उनका जन्म 7 नवंबर 1858 को बंगाल के हबीबगंज जिले में हुआ । यह क्षेत्र अब बंगलादेश में है । विपिनचंद्र पाल आरंभ से ही एक संकल्पवान जीवन जीने के लिये जाने जाते हैं । वे जो निर्णय कर लेते थे उस पर अंतिम क्षण तक अटल रहते थे । भारतीय गरिमा और स्वतंत्रता के लिये उन्होंने दोनों प्रकार के संघर्ष किये । वे अहिसंक आँदोलन में सक्रिय हुये और क्राँतिकारी आँदोलन में भी । स्वतंत्रता संघर्ष के साथ उन्होंनेभारतीय समाज की बुराइयों को दूर करने के लिये एक सशक्त सामाजिक अभियान भी चलाया । उनकी स्पष्टवादिता इस आक्रामक संघर्ष से परिवार में मतभेद बढ़े तो उन्होंने परिवार से नाता तोड़ लिया । वे अपनी धुन और संकल्प के पक्के थे । तब उन्होंने गाँधी जी के भी कुछ विचारों का विरोध किया था । वे भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्र सेवी नेता होने के साथ शिक्षक, पत्रकार, लेखक व ओजस्वी वक्ता भी थे और उन्हें भारत में क्रांतिकारी विचारों का जनक भी माना जाता है । लाला लाजपत राय, बालगंगाधर तिलक के साथ उनकी जोड़ी सुप्रसिद्ध थी । इन त्रिदेव कहा जाता था "लाल, बाल, और पाल । इन त्रिदेवों ने पूरे भारत में भ्रमण कर अपने ओजस्वी विचारों और अभिव्यक्ति के चलते अंग्रेजों की नींव हिला दी थी । त्रिदेवों के इस समूह को "गरम दल" की संज्ञा दी गई । विदेशी विचारों, वस्तुओं और वस्त्रों के वहिष्कार करने का आव्हान सबसे पहले इन्ही त्रिदेवों ने किया था। इसका आरंभ करने वाले विपिन चंद्र पाल ही थे । इनमें ब्रिटेन में तैयार उत्पादों, विदेशी मिलों में तैयार कपड़ों की होली सबसे पहले विपिन चंद्र पाल जी के आव्हान पर ही जलाई गई । इसके अतिरिक्त उनके आँदोलन में औद्योगिक तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में हड़ताल आदि थे । जीवन भर राष्ट्रहित के लिए संघर्ष करने वाले पाल का 20 मई 1932 को निधन हो गया । भारत सरकार ने उन की स्मृति में सन १९५८ में डाकटिकट जारी किया है । लेखक - रमेश शर्मा