चाणक्य नीति:- लक्ष्मी का वास Date : 05-Jun-2024 मुर्खा: यत्र न पूज्यंते धान्यं यत्र सुसंचितम | दांपत्यों: कालहो नास्ति तत्र श्री स्वयमागता || आचार्य चाणक्य यहां विद्वानों एवं स्त्री के सम्मान में खुशहाली एवं शांति की स्थिति का प्रतिपादन करते हुए कहते हैं कि जहां मूर्खों का सम्मान नही होता, अन्न का भंडार भरा रहता है और पति -पत्नी कलह नहीं हो, वहां लक्ष्मी स्वयं आती है | आशय यह है कि जिन घरों में कोई भी व्यक्ति मूर्ख नहीं होता, अनाज - खाद्य पदार्थ आदि के भंडारण भरे रहते हैं तथा पति पत्नी में आपस में कोई लड़ाई -झगड़ा, मनमुटाव नही रहता | ऐसे घरों में सुख -शांति, धन -संपत्ति आदि सदा बनी रहती है | इसीलिए यह कहा जा सकता है कि यदि देश की समृद्धि और देशवासियों की संतुष्टि अभीष्ट है तो मूर्खों के स्थान पर गुणवान व्यक्तियों को आदर देना चाहिए | बुरे दिनों के लिए अन्न का भंडारण करना चाहिए | तथा घर -गृहस्थ में वाद विवाद का वातावरण नही बनने देना चाहिए | जब विद्वानों का आदर और मूर्खों तिरस्कार होगा | अन्न की प्रचुरता होगी तथा पति पत्नी में सदभाव होगा तो गृहस्थों के घरों अथवा देश में संपत्ति उत्तरोत्तर बढ़ती ही जायेगी - इसमें संदेह नहीं हो सकता और यही आचरण व्यक्ति और देश को समुन्नत करने में सहायक होगा |