देश लोकतंत्र का महापर्व मनाकर फुरसत हो चुका है। अब नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह को देखने का इंतजार है। इस बार का आम चुनाव कई मायने में खास रहा। सात चरणों में हुए चुनाव के दौरान देश ने अपार गर्मी झेली। मतदाता तेज धूप में नेताओं के भाषण सुनते रहे। चार जून को नतीजे आए। इन नतीजों ने कुछ हद तक चौंकाया भी। पहली बार एग्जिट पोल के अनुमान धराशायी हो गए। जनादेश आने से एक दिन पहले तीन जून को भारत निर्वाचन आयोग ने नई दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में अपने कीर्तिमान भी गिनाए।
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने सगर्व कहा कि पहली बार आम चुनाव में 31 करोड़ महिलाओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। इस बार घर से ही वोटिंग करने का भी रिकॉर्ड बना है। साथ ही इस बार चुनाव में 31 करोड़ 20 लाख महिलाओं सहित 64 करोड़ 20 मतदाताओं के हिस्सा लेने के साथ विश्व रिकॉर्ड बना है। यह आंकड़ा जी-7 देशों के मतदाताओं का 1.5 गुना जबकि यूरोपीय संघ के 27 देशों के मतदाताओं का 2.5 गुना है। लोकसभा चुनाव-2024 पर कुमार ने काफी कुछ कहा। उन्होंने कहा कि यह उन आम चुनावों में से एक है, जिसमें हमने हिंसा नहीं देखी। उन्होंने सुखद संदेश दिया कि अब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी।
यह सनद किया जाए कि भारत निर्वाचन आयोग ने अठारहवीं लोकसभा के लिए नवनिर्वाचित सदस्यों की सूची राष्ट्रपति को सौंप दी है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार, निर्वाचन आयुक्त (द्वय) ज्ञानेश कुमार और डॉ. सुखबीर सिंह संधू छह जून को शाम साढ़े चार बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रपति को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 73 के संदर्भ में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना की एक प्रति सौंपी। इसमें लोकसभा के निर्वाचित सदस्यों के नाम शामिल हैं। इसके बाद तीनों राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का आशीर्वाद लेने उनके समाधि स्थल राजघाट पहुंचे। राजघाट पर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद आयोग का बयान आया। उसे केंद्र सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने जारी किया।
पीआईबी की वेबसाइट पर आयोग का अविकल बयान-''हम यहां राष्ट्र द्वारा हमें सौंपे गए पवित्र कार्य, 18वीं लोकसभा के आम चुनाव सम्पन्न कराने के बाद राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए खड़े हैं। हम भारत के लोगों की इच्छा को लगभग अहिंसक तरीके से उत्प्रेरित करने के बाद अपने दिल में विनम्रता लिए हुए यहां खड़े हैं।''
''लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है'', यह वह स्पष्ट प्रतिबद्धता थी जिसके साथ 16 मार्च, 2024 को 18वीं लोकसभा के चुनावों की घोषणा की गई थी। चुनावी प्रक्रिया को हिंसा से मुक्त रखने की इस प्रतिज्ञा के पीछे हमारी प्रेरणा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी थे। उन्होंने इंसान के बीच समानता की वकालत की और सभी के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों की वकालत की।
महात्मा के विचारों में, वयस्क मताधिकार '' सभी प्रकार के वर्गों की सभी उचित आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम बनाता है''। मतदान केन्द्रों पर उत्सव के मूड में लंबी कतारें और मतपत्र के माध्यम से अपने भविष्य का फैसला करने का दृढ़ संकल्प महात्मा के पोषित आदर्शों और भारत की सभ्यतागत विरासत का प्रमाण था।
आयोग ने पूरे दिल, दिमाग और पूरी ईमानदारी के साथ यह सुनिश्चित करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया है कि सबसे आम भारतीय का मताधिकार किसी भी कीमत पर नकारा न जाए, बल्कि इसे सख्ती से सक्षम बनाया जाए, कि दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी प्रतियोगिता लोकतांत्रिक अधिशेष पैदा करे, और हमारे विशाल परिदृश्य में शामिल करोड़ों लोगों के गहन कार्यों में किसी भी रूप में हिंसा की थोड़ी सी भी छाया पड़ने की अनुमति न हो। जम्मू-कश्मीर और मणिपुर समेत भारत के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने अपने परिपक्व आचरण से एक मिसाल कायम की है जो भविष्य के लिए शुभ संकेत है। शांति और विकास का रास्ता गोली नहीं बल्कि मतपत्र है।
हम इस शपथ के साथ अपनी बात समाप्त करते हैं कि भारत के निर्वाचन आयोग की राष्ट्र के प्रति सेवा, जो अब अपने 76वें वर्ष में है, अडिग समर्पण के साथ जारी रहेगी। हमने अफवाहों और निराधार संदेहों के साथ चुनावी प्रक्रिया को दूषित करने के सभी प्रयासों को खारिज कर दिया, जो अशांति भड़का सकते थे। भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं में अपार आस्था रखने वाले आम आदमी की 'इच्छा' और 'बुद्धि' की जीत हुई है। हम नैतिक और कानूनी रूप से स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव आयोजित करके हमेशा इसी भावना को बनाए रखने के लिए बाध्य हैं। जय हिंद!'' आयोग के इस अविकल बयान के बाद इसे भी संसदीय इतिहास में दर्ज किया जाना चाहिए कि इस बार आम चुनाव में 65.79 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
लेखक:- मुकुंद
