भारत के पहले स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जाने जाने वाले मंगल पांडे ने 1857 में ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।अंग्रेजो से स्वतंत्रता पाने के लिए हमारे देश के कई नवयुवको ने कुर्बानी दी थी उन्होंने भारत देश को आज़ाद करने के लिए अंग्रेजो से लड़ाई लड़ी थी लेकिन जिस एक ने इस लड़ाई का आरंभ किया था वो थे मंगल पाण्डेय | मंगल पाण्डेय ने आज़ादी के प्रति लड़ाई की शुरुआत 27 मार्च 1857 में की थी |
मंगल पाण्डेय ने 22 वर्ष की उम्र में ही ब्रिटिश इर्ष्ट इंडिया कंपनी की सेना मे बंगाल नेटिव इन्फेंट्री की 34वी बटालियन मे भर्ती किये गए।अंग्रेजी शासन ने अपने इस बटालियन को एन्फील्ड राइफल दी थी, जिसका निशाना अचूक था। इस बंदूक में गोली भरने की प्रक्रिया काफी पुरानी थी। इसमें गोली भरने के लिए कारतूस को दांतों से खोलना होता था और मंगल पांडेय ने इसका विरोध कर दिया था, क्योंकि ऐसी बात फैल चुकी थी कि इस कारतूस में गाय व सुअर के मांस का उपयोग किया जा रहा है।27 मार्च 1857 को बैरकपुर परेड मैदान कलकत्ता के निकट मंगल पाण्डेय जो दुगवा रहीमपुर(फैजाबाद) के रहने वाले थे रेजीमेण्ट के अफ़सर लेफ़्टीनेण्ट बाग पर हमला कर के उसे घायल कर दिया। जनरल ने जमादार ईश्वरी प्रसाद ने मंगल पांडेय को गिरफ़्तार करने का आदेश दिया पर ज़मीदार ने मना कर दिया।
सिवाय एक सिपाही शेख पलटु को छोड़ कर सारी रेजीमेण्ट ने मंगल पाण्डेय को गिरफ़्तार करने से मना कर दिया। मंगल पाण्डेय ने अपने साथियों को खुलेआम विद्रोह करने के लिये कहा पर किसी के ना मानने पर उन्होने अपनी बंदूक से अपनी प्राण लेने का प्रयास किया। परन्तु वे इस प्रयास में केवल घायल हुये। 6अप्रैल 1857को मंगल पाण्डेय का कोर्ट मार्शल कर दिया गया और 8 अप्रैल को फ़ांसी दे दी गयी।
मंगल पांडे द्वारा लगायी गयी विद्रोह की यह चिंगारी बुझी नहीं। एक महीने बाद ही 10मई सन् 1857 को मेरठ की छावनी में कोतवाल धनसिंह गुर्जर के नेतृत्व में बगावत हो गयी। ओर गुर्जर धनसिंह कोतवाल इस के जनक के रूप में सामने आए यह विप्लव देखते ही देखते पूरे उत्तरी भारत में फैल गया जिससे अंग्रेजों को स्पष्ट संदेश मिल गया कि अब भारत पर राज्य करना उतना आसान नहीं है जितना वे समझ रहे थे। इसके बाद ही हिंदुस्तान में चौंतीस हजार सात सौ पैंतीस अंग्रेजी कानून यहाँ की जनता पर लागू किये गये ताकि मंगल पाण्डेय सरीखा कोई सैनिक दोबारा भारतीय शासकों के विरुद्ध बगावत न कर सके।
इस प्रकार मंगल पाण्डेय आज़ादी की लड़ाई की शुरुआत करने वाले पहले स्वतंत्रता सेनानी बने उनका दिया गया बलिदान व्यर्थ नही गया बल्कि वह युवाओ में आज़ादी की लड़ाई के लिए एक चिंगारी बन गया जिसने उस लड़ाई की आग लगा दी |
