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धीरे-धीरे खत्म हो रही संयुक्त परिवार की परंपरा पर मंथन करने की जरूरत : रामनाथ कोविन्द

Date : 08-Apr-2024

 उदयपुर, 08 अप्रैल । पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि बुजुर्ग बोझ नहीं, वे एसेट हैं। वे अनुभव का खजाना हैं। वे हमारी सम्पत्ति हैं। बुजुर्गों का हमारे पास होना एक आश्वासन है। एक परिवार में बुजुर्गं की अहमियत होती है। हर काल और समय में उनकी उपयोगिता सार्थक होती है। बुजुर्गों में अनुभव का धन और आत्मविश्वास का बल होता है।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द सोमवार को तारा संस्थान के अंतर्गत संचालित मां द्रोपदी देवी आनंद वृद्धाश्रम के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हर परिवार की अपनी अलग कहानी होती है। कोई कहानी छोटी होती है, कोई बड़ी होती है। उन्हें सुनने और सुनाने में ही हमारा जीवन गुजर जाता है। इसलिए हमें यह सोचना चाहिये कि हमने आज तक केवल लिया ही लिया है। हमने समाज को दिया क्या है। जिस दिन देने का भाव आ जाएगा, यकीन मानिये जितना आनन्द लेने में आ रहा था, उससे दुगुना आनन्द देने में आएगा।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि आज के दौर में परिवार में बढ़ते विघटन एवं भौतिक सुख सुविधाओं की प्राप्ति की महत्वाकांक्षाओं के चलते घर के युवा अक्सर घर के बुजुर्ग माता-पिता को अकेला छोड़कर रोजगार और आर्थिक लाभ के लिए चले जाते हैं। भौतिक महात्वाकांक्षाएं उन्हें ऐसा करने पर मजबूर करती हैं। इसमें उनकी भी कोई गलती नहीं है। उन्हें जीवनयापन के लिए ऐसा करना ही पड़ता है। इसी तरह से बुजुर्गों के घर में अकेले रहने का दूसरा कारण यह भी सामने आता है कि पहले हमारे यहां संयुक्त परिवार की परंपरा धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। इस पर हमें मंथन करने की जरूरत है। इसकी शुरुआत भी स्वयं से है करनी होगी। सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी समझना होगा।

तारा संस्थान की संस्थापक अध्यक्ष कल्पना गोयल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि ऐसा पुनीत कार्य करने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता से मिली। पहले वह बुजुर्गों की ऐसी स्थितियां देख कर भावुक हो जाया करती थीं, लेकिन धीरे-धीरे इनके साथ रह कर इनकी सेवा करने का अवसर मिला तो अब उनमें हिम्मत ओर हौसला पैदा हो गया है और इन सभी की सेवा करने में उन्हें आनन्द आता है।

समारोह में नारायण सेवा संस्थान के संस्थापक कैलाश मानव ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन संस्थापक सचिव दीपेश मित्तल ने किया। समारोह में तारा संस्थान की ओर से संचालित ‘मस्ती की पाठशाला’ के बच्चों ने भावपूर्ण प्रस्तुति देते हुए ‘राम आएंगे’ भजन पर नाट्य का मंचन किया। इसमें वनवास के दौरान माता शबरी द्वारा बड़े ही स्नेह भाव के साथ राम-लक्ष्मण को झूठे बेर खिलाने के दृश्य ने भी को भावविभोर कर दिया। इसके बाद बुजुर्ग फैशन शो हुआ, जिसमें बुजुर्गों ने लता मंगेशकर, आर्य भट्ट, वीर सावरकर, कल्पना चावला, अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ. भीमराव अम्बेडकर, रानी लक्ष्मीबाई, स्वामी विवेकानन्द, सरदार वल्लभभाई पटेल एवं मेरीकॉम के चरित्र को जीवन्त किया।

इससे पूर्व कोविन्द मां द्रोपदी देवी आनंद वृद्धाश्रम में एक-एक कर बुजुर्गों से मिले और उनसे बातचीत की। उन्होंने कई बुजुर्गों से उनके हालचाल जाने और लगातार यही पूछते रहे कि आप यहां कैसा अनुभव कर रहे हैं। कोविन्द बुजुर्ग महिला-पुरुषों से इस कदर घुलमिल गये कि उनके साथ हंसी-ठहाकों से पूरा परिसर गूंज उठा। कोविन्द जब संस्थान के बुजुर्गों के मेडिकल वार्ड में पहुंचे तो वहां पर उनकी सारी मेडिकल सुविधाओं की जानकारी ली एवं बुजुर्गों के स्वास्थ्य के बारे में जाना। इसी वार्ड में बुजुर्ग बृजकिशोर शर्मा ने गीत भी सुनाया।


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