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धार की ऐतिहासिक भोजशाला में 18वें दिन भी जारी रहा एएसआई का सर्वे

Date : 09-Apr-2024

 धार। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के आदेश पर धार की ऐतिहासिक भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) विभाग का सर्वे सोमवार को 18वें दिन भी जारी रहा। दिल्ली और भोपाल के 19 अधिकारियों की टीम 33 मजदूरों के साथ सुबह आठ बजे भोजशाला परिसर में पहुंची और शाम पांच बजे बाहर निकली। इस दौरान टीम ने आधुनिक उपकरणों के जरिए वैज्ञानिक पद्धति से करीब नौ घंटे काम किया। सर्वे टीम के साथ हिंदू पक्ष के गोपाल शर्मा, आशीष गोयल और मुस्लिम पक्ष के अब्दुल समद खान भी मौजूद रहे।

भोजशाला में सोमवार को गर्भगृह में हवन कुंड के पास मिट्टी हटाने का काम हुआ। भोजशाला में अंदर पत्थरों की ब्रसिंग की गई और उसके आसपास से मिट्टी हटाकर फोटो लिए गए। सर्वे टीम ने भोजशाला में 14 गड्ढे चिन्हित किए हैं। इनमें से सात जगह खुदाई का काम जारी रहा। साथ ही भोजशाला परिसर के पास स्थित अकल कुइया की भी नपती हुई।

18वें दिन का सर्वे खत्म होने के बाद हिन्दू पक्षकार गोपाल शर्मा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि आज सर्वे का 18वां दिन है और कार्य प्रगति पर है। समय अवधि में हम निर्णायक भूमिका में पहुंचने वाले हैं। जिन उद्देश्यों को लेकर यह पिटीशन दायर हुई थी वह सार्थक सिद्ध होगी। सर्वे टीम ने अकल कुइया की नपती की है। निश्चित रूप से यह अकल कुइया राजा भोज द्वारा स्थापित सरस्वती कूप है। राजा भोज द्वारा लिखित चारु चर्या नामक पुस्तक में इसका उल्लेख है कि आर्याव्रत में सात स्थानों पर आह्वान करके सरस्वती कूप स्थापित किए गए थे, जहां-जहां गुरुकुल होते थे। विद्यार्थियों का ज्ञानवर्धन और बुद्धि तीक्ष्ण हो इसके लिए उन्हें इस जल का सेवन करवाया जाता था, जिससे उनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती थी। ज्ञान बढ़ता था, याददाश्त अच्छी रहती थी।

हिन्दू पक्षकार गोपाल शर्मा ने कहा कि भोजशाला परिसर के पास स्थित अकल कुइया के आसपास ज्यादा टीम लगी थी। वहां सर्वे किया गया। टीम के सदस्य अंदर भी उतरे। उन्होंने बताया कि जो पुराने लोग हैं उन्होंने देखा है, जो सरस्वती कूप वर्तमान स्थिति में है, कैद में है। इसका रास्ता दो गुंबजों के बीच में से जाता था। सात फीट नीचे 14 कोणीय अकल कुइया बनी हुई है, इसको वर्तमान में अकल कुइया कहा जाता है। वास्तविकता में पातालगंगा सरस्वती रूप के नाम से इसका संबोधन था। सीढ़ियों के द्वारा इसमें उतरते थे। दक्षिण की ओर से इसमें प्रवेश करते थे। तो उत्तर की दीवार पर गणेश जी की आकृति बनी हुई है। इसका उल्लेख हरी भाऊ वाकण कर ने अपनी पुस्तक में किया था।

गौरतलब है कि 718 वर्षों के बाद आज ही के दिन 2003 में भोजशाला के ताले हिंदुओं के लिए खुले थे। सन् 1305 में अलाउद्दीन खिलजी ने यहां आक्रमण किया था, तब से पूजन पाठ बंद था, लेकिन लम्बे संघर्ष के बाद 08 अप्रैल 2003 को हिन्दुओं को पूजा का अधिकार मिला था। कल मंगलवार है। लिहाजा हिन्दू समुदाय के लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजन पाठ करेंगे।



मंदिर हो तो हमें दो और मस्जिद हो तो उन्हें दे दो

मुस्लिम पक्ष द्वारा सर्वे पर रोक मांग के संबंध में कोर्ट में आवेदन लगाने को लेकर गोपाल शर्मा ने कहा कि यह उनका दुराग्रह है। यह उनकी मानसिकता है, जिसका माल नहीं होता वह ही रोक लगाता है। हम तो खुद सर्वे के लिए गए कि अगर मंदिर है तो हमको दे दिया जाए और मस्जिद है तो उनको दे दो। निश्चित रूप से सच सामने आएगा, जैसे अयोध्या, मथुरा, काशी का सच सामने आया है। भोजशाला का टाइटल भी बदलेगा। भोजशाला शारदा सदन और सरस्वती कंठाभरण के नाम से जानी जाती थी। ये अपने गौरव को इस सर्वे के बाद पुनः प्राप्त करेगी।


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