नई दिल्ली, 12 सितंबर भारत में वर्षों पहले मोटा अनाज (श्री अन्न) का ही सेवन किया जाता था। इसके कारण लोग बीमार नहीं पड़ते थे। श्री अन्न की ब्रांड एम्बेसडर मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले की रहने वाली 27 वर्षीय आदिवासी महिला लहरी बाई का कहना है कि उनकी दादी ने पूरी उम्र मोटे अनाजों का सेवन किया और वह कभी बीमार नहीं पड़ीं। वह 100 वर्षों के जीवन काल में कभी दवा नहीं खाईं। लहरी ने कहा कि उनके पिता 80 वर्ष के हैं। वह भी हमेशा श्री अन्न का सेवन करते हैं। उनको भी कभी दवा नहीं खानी पड़ती है।
लहरी ने मंगलवार को हिन्दुस्थान समाचार से विशेष बातचीत में कहा कि वह चाहती हैं कि देश-दुनिया में कोई बीमार न पड़े। इसके लिए सभी को श्री अन्न का सेवन करना होगा। ऐसे में किसानों को भी इसकी खेती पर जोर देने की जरूरत है। वह लगातार किसानों को श्री अन्न की खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं और मोटे अनाजों का संरक्षण भी कर रही हैं।
लहरी को आज श्री अन्न की प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए भारत सरकार के “पौध किस्म और कृषक अधिकार प्राधिकरण” ने 2021-22 के “प्लांट जीनोम सेवियर फार्मर अवार्ड” से सम्मानित किया गया है। लहरी को यह पुरस्कार दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आईसीएआर के सी.सुब्रमण्यम ऑडिटोरियम में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया।
लहरी कहती हैं कि वह विलुप्त हो रहे मोटे अनाजों की प्रजातियों का संरक्षण का काम बीते 10 वर्षों से करती आ रही हैं। वह किसानों को इसकी खेती के लिए जागरूक भी करती हैं और उन्हें श्री अन्न के बीज भी उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष पहले जब उन्होंने मोटे अनाजों के बीज गांव-गांव घूमकर एकत्र करना शुरू किया तो लोग हंसते थे लेकिन आज पूरी दुनिया को समझ आ रहा है कि मोटा अनाज हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना जरूरी है।
500 से अधिक किसानों को उपलब्ध कराया मोटे अनाज का बीज:
लहरी ने कहा कि वह आस-पास के लगभग 500 से भी अधिक किसानों को श्री अन्न के बीज उपलब्ध करा चुकी हैं। जिस किसान को वह बीज देती हैं, उससे वह बीज के बदले बीज ही वापस लेती हैं। उन्होंने कहा कि वह एक किलो बीज के बदले डेढ़ किलो बीज वापस लेती हैं। इस बीज को वह अपने बीज बैंक में जमा करती हैं और फिर उसे दूसरे किसान को उपलब्ध कराती हैं।
विलुप्त हो चुकी श्री अन्न की प्रजातियों को संरक्षित कर रही हैं लहरी:
लहरी कहती हैं कि वह लगभग 50 से 60 प्रकार के मोटे अनाज और 60 से 70 प्रकार की हरी सब्जियों की प्रजातियों को संरक्षित कर चुकी हैं। वह मोटे अनाज के तौर पर बाजरा, ज्वार, रागी, कंगनी, चीना, सलहार, सांवा, सिकिया, कोदो, कुटकी, बैगानी राहर और बसारा सहित अन्य मोटे अनाजों का संरक्षण कर रही हैं, साथ ही बेला राहर, चाकीतुमा, चकौडा और चेंच सहित अन्य सब्जी के बीज का भी संरक्षण कर रही हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने बीते दिनों विलुप्त होते मोटे अनाजों के बीज सहेजने के लिए लहरी बाई की सराहना की थी और मन की बात कार्यक्रम में उनका जिक्र भी किया था। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उनके इस प्रयास की सराहना कर चुके हैं।
मोटे अनाज की चर्चा इन दिनों पूरी दुनिया में है। भारत के प्रयासों से वर्ष 2023 में अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। मिलेट्स वर्ष मनाने के लिए भारत के प्रस्ताव को वर्ष 2018 में खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) की ओर से अनुमोदित किया गया। उसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष के रूप में घोषित किया।
