देहरादून, 12 सितंबर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लिए हम सबको अपना दायित्व निभाना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) भविष्य को दर्शाती है और ये एक दार्शनिक दस्तावेज है, जो उभरते भारत की तस्वीर काे दिखाती है।
मंगलवार को बिदौली स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) में केंद्रीय शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने ‘अमृत काल विमर्श ऑन विकसित भारत 2047‘ में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पंच प्रणों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को 2047 तक विकसित बनाने के लिए हम सबको अपना दायित्व निभाना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) भविष्य को दर्शाती है।
केन्द्रीय मंत्री ने संस्थान के छात्रों को भारत में जी-20, अमृत काल, नेशनल एजूकेशन पॉलिसी, भारत के विज्ञान, डिजिटल क्षेत्र और विश्व में बढ़ते भारत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जी-20 के दौरान अमेरीका, ब्रीटेन, जर्मनी सहित अन्य देश पहली बार राष्ट्रपिता माहत्मा गांधी की समाधि पर एकत्रित होना नए भारत की तस्वीर है और ऐसा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व से ही मुमकिन हो पाया है। आज बदले हुए भारत का प्रभाव का ही असर है कि भारत के प्रधानमंत्री से लोग मिलने का समय ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज भारत हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है और भारत चिंता करता है कि विश्व सुरक्षित कैसे रहेगा। उर्जा खपत में भारत विश्व के तीसरे पायदान पर है। इसके बाद भी विश्व कार्बन उत्सर्जन में भारत प्रदूषक देशों की सूची में नहीं आता है। भारत आज चिंता करता है कि विश्व में कार्बन उत्सर्जन कम कैसे होगा। आज भारत ग्रीन एनर्जी प्रोडक्शन में विश्व में चौथे नंबर पर है और उसका लक्ष्य 2024 तक 500 गीगा वॉट ग्रीन एनर्जी उत्पादित करने का लक्ष्य है।
इसी कड़ी में जी-20 के दौरान भारत ने बायो फ्यूल एलायंस का भी गठन किया जो ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि 2014 तक ईंधन में 1 प्रतिशत इथेनॉल का प्रयोग होता था जो 2023 में बढ़ कर 10 प्रतिशत हो गया है और इसे 2025 तक 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। ये सब नए उभरते भारत की तस्वीर है।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि आज भारत तकनीकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इन क्षेत्रों में ग्लोबल लीडर बन कर उभर रहा है। आज विश्व का 46 प्रतिशत यूपीआई भुगतान भारत में हो रहा है। भारत आज हर प्रकार की शिक्षा को ऑनलाइन कर चुका है। आज विश्व के सामने चुनौती है कौशल कामगारों के न उपलब्ध होने की और भारत विश्व की इस समस्या का समाधान है। भारत के अंदर ये क्षमता है जो इस स्किल गैप को भर सकता है और विश्व गुरु बन सकता है।
