प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आज से शुरू हो रहे जी-20 नेताओं के तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री सभी सत्रों में हिस्सा लेंगे और वैश्विक दक्षिण की चिंताओं, सतत विकास, जलवायु कार्रवाई, ऊर्जा परिवर्तन और वैश्विक शासन सुधार जैसे प्रमुख मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे। 2014 में पदभार संभालने के बाद यह उनका 12वाँ जी-20 शिखर सम्मेलन है। इस वर्ष का आयोजन खास है क्योंकि पहली बार जी-20 समिट अफ्रीकी महाद्वीप पर हो रहा है।
इस वर्ष जी-20 का विषय है—“एकजुटता, समानता और स्थिरता”। अपनी अध्यक्षता में दक्षिण अफ्रीका ने जिन प्राथमिकताओं पर बल दिया है उनमें आपदा-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना, निम्न-आय वाले देशों के लिए ऋण स्थिरता, न्यायसंगत ऊर्जा परिवर्तन हेतु वित्त जुटाना, और समावेशी विकास के लिए महत्त्वपूर्ण खनिजों का दोहन शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार शाम को जोहान्सबर्ग पहुँच चुके हैं।
आज के कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री की कई द्विपक्षीय मुलाकातें भी शामिल हैं। शिखर सम्मेलन का उद्घाटन सत्र “समावेशी और सतत आर्थिक विकास—किसी को पीछे न छोड़ना” विषय पर केंद्रित होगा। वैश्विक आर्थिक सहयोग के प्रमुख मंच के रूप में जी-20 अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक स्थिरता को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी स्थापना 19 देशों और यूरोपीय संघ के साथ हुई थी, और भारत की 2023 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता प्रदान की गई।
भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान “वसुधैव कुटुम्बकम — एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” की भावना को वैश्विक मंच पर दृढ़ता से प्रस्तुत किया। दिसंबर 2022 से नवंबर 2023 तक भारत ने 60 शहरों में 200 से अधिक बैठकों की मेज़बानी की, जिनमें सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व शामिल था। 135 देशों के 30,000 प्रतिनिधियों सहित एक लाख से अधिक लोगों की सहभागिता के साथ, यह अब तक की सबसे व्यापक जी-20 भागीदारी रही। भारत के नेतृत्व ने जी-20 को मानव-केंद्रित वैश्विक मंच में बदलने के लिए एक स्पष्ट और दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत किया, जिसने अधिक समावेशी, समतामूलक और टिकाऊ भविष्य की नींव मजबूत की।
