शिमला, 06 फ़रवरी । हिमाचल प्रदेश में विधायक क्षेत्र विकास निधि और ऐच्छिक निधि जारी न किए जाने के मुद्दे पर भाजपा विधायक दल ने शुक्रवार को राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मुलाकात कर प्रदेश सरकार के खिलाफ ज्ञापन सौंपा। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में पहुंचे भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार अक्तूबर 2025 के बाद से विधायक क्षेत्र विकास निधि जारी नहीं कर रही है, जिससे विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेश इस वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से भारी नुकसान झेल चुका है और ऐसे समय में विकास तथा पुनर्वास कार्यों के लिए विधायक निधि की जरूरत और बढ़ जाती है। भाजपा विधायक दल का कहना है कि बजट में प्रावधान होने के बावजूद निधि की केवल आधी राशि जारी की गई है, जबकि शेष राशि रोके जाने से विकास योजनाएं ठप पड़ रही हैं और जनप्रतिनिधियों को जनता से किए गए वादे पूरे करने में कठिनाई हो रही है।
भाजपा विधायकों ने यह भी आरोप लगाया कि विधायकों की ऐच्छिक निधि समय पर जारी नहीं होने के कारण गरीब, बीमार और आपदा प्रभावित लोगों को तुरंत आर्थिक सहायता देने में भी बाधा आ रही है। इससे जनता के बीच जनप्रतिनिधियों की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ रहा है। ज्ञापन में कहा गया कि परंपरा के अनुसार विधायक अपने क्षेत्रों की विकास प्राथमिकताएं पीडब्ल्यूडी और जल शक्ति विभाग में दर्ज कराते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से विपक्षी विधायकों द्वारा दी गई प्राथमिकताओं पर न तो विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है और न ही उन्हें नाबार्ड से स्वीकृति के लिए भेजा जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद कहा कि कई मामलों में स्वीकृति पत्र जारी होने के बावजूद ट्रेजरी स्तर पर भुगतान रोका जा रहा है, जिससे विकास कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था और संतुलित विकास की भावना के अनुरूप नहीं है और विपक्षी क्षेत्रों के विकास कार्य योजनाबद्ध तरीके से प्रभावित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक विधायक निधि की केवल दो किश्तें—55-55 लाख रुपये—ही जारी की गई हैं, जबकि बाकी राशि लंबित है।
भाजपा विधायक दल ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि प्रदेश सरकार को निर्देश दिए जाएं कि विधायक क्षेत्र विकास निधि और ऐच्छिक निधि तुरंत जारी की जाए तथा विधायकों की विकास प्राथमिकताओं से संबंधित परियोजनाओं की डीपीआर तैयार कर उन्हें नाबार्ड को भेजा जाए, ताकि सभी विधानसभा क्षेत्रों में समान रूप से विकास कार्य आगे बढ़ सकें।
