मेघालय में अवैध कोयला खनन से साल-दर-साल होते रहे हैं हादसे | The Voice TV

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मेघालय में अवैध कोयला खनन से साल-दर-साल होते रहे हैं हादसे

Date : 06-Feb-2026

 शिलांग, 06 फरवरी । मेघालय में अवैध कोयला खनन से साल-दर-साल हादसे होते रहे हैं। एक बार फिर बड़ा हादसा गुरुवार पूर्वाह्न लगभग 11 बजे हुआ। इस हादसे में 18 मजदूरों की जान चली गई। आठ मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से एक की हालत गंभीर बताई गई है।

पता चला है कि इस खदान में मजदूरों ने डाइनामाइट विस्फोट किया। इससे खदान में मौजूद मिथेन गैस की वजह से आग लग गई। देखते ही देखते कुआं नुमा तीन खदानों से आग की लपटें उठने लगीं। हादसे के बाद खदान के बाहर मौजूद अन्य मजदूर भाग गए। सूचना पाकर पहुंचीं सुरक्षा एजेंसियों ने अनुमान जताया है कि मृतकों की संख्या में इजाफा हो सकता है।

बताया गया है कि कोयला खदान से फिलहाल किसी तरह का स्मोक बाहर नहीं आ रहा है। फिर भी पूरी सतर्कता बरती जा रही है। पांच फरवरी को एसईडीसी को जानकारी मिली थी कि ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले के मिनसिंगट-थांगस्को इलाके में कोयला खदान में सुबह करीब 11 बजे डायनामाइट विस्फोट हुआ। शाम 6.30 बजे शुरुआती रिपोर्ट मिली कि 18 मजदूरों की मौत हो गई है और आठ घायल अवस्था में मिले। इनमें एक गंभीर रूप से घायल को इलोंग सिविल अस्पताल में शिफ्ट किया गया और सात घायलों को सिविल अस्पताल खलीहरियात ले जाया गया। वहां से उसे नेग्रीम शिलांग रेफर किया गया।

जिला प्रशासन ने सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, अग्निशमन एवं एनडीआरएफ की बचाव टीमों को मौके पर भेजा गया। एसडीएमए ने कम्युनिकेशन के लिए एमपीआरओ से अनुरोध किया। साथ ही सेना, वायु सेना को स्टैंड-बाय पर रहने का अनुरोध किया गया।

गुवाहाटी स्थित प्रथम बटालियन एनडीआरएफ के कमांडेंट एचपी कंडारी के नेतृत्व में एनडीआरएफ की तीन टीम राहत एवं बचाव कार्य के लिए घटनास्थल के लिए रवाना हुई हैं। हालांकि, घटनास्थल बेहद दूर-दराज एवं दुर्गम इलाके में स्थित है। इस कारण सुरक्षा एजेंसियों को पहुंचने में कठिनाई हो रही है।

घटनास्थल पर मौजूद प्रथम बटालियन एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर अनुराग कुमार सिंह ने आज बताया कि आठ सदस्यी हमारी एक टीम बीती देररात 11 बजे हादसे के पास पहुंची। राहत एवं बचाव कार्य आरंभ किया गया है। एनडीआरएफ की तीन टीमें जिसमें दो टीम गुवाहाटी से मेघालय पहुंची हैं। आज दोपहर तक सभी टीम मौके पर पहुंच जाएंगी। इसके बाद राहत अभियान में तेजी आएगी।

एनडीआरएफ की टीमें केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (सीबीआरएन) सामग्री से भी लैस हैं। घटनास्थल जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर है और मुश्किल रास्ते की वजह से जिला मुख्यालय से वहां पहुंचने में तीन घंटे लगते हैं। वहां सिर्फ 4x4 गाड़ियों से ही पहुंचा जा सकता


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