कोलकाता, 11 फरवरी। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में वस्त्र उद्योग की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन राज्य सरकार के पास इसे विकसित करने का स्पष्ट रोडमैप नहीं है। इसके साथ ही केंद्रीय बजट को “विकसित भारत” की दिशा में निर्णायक कदम बताया। वहीं, बुधवार को पश्चिम बंगाल की राजधानी काेलकाता स्थित साल्टलेक के एक होटल में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ममता सरकार पर भी तीखे प्रहार करते हुए तुष्टिकरण और बदहाल शासन व्यवस्था को लेकर घेरा।
भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन की शुरुआत दीनदयाल उपाध्याय को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। जापान को पीछे छोड़ते हुए भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और देश का सकल घरेलू उत्पाद लगभग 4.18–4.19 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय 2014 के दो लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अब लगभग छह गुना हो गया है। इस बजट में 12 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय निर्धारित किया गया है।
उन्होंने कहा कि सड़क, हवाई अड्डे, बंदरगाह, माल ढुलाई गलियारे और टियर-2 व टियर-3 शहरों के एकीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। सूरत–दानकुनी फ्रेट कॉरिडोर से परिवहन लागत में 30 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना जताई गई है। सिलिगुड़ी–वाराणसी कॉरिडोर और दुर्गापुर क्षेत्र में विकास से लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि दस हजार करोड़ रुपये का एमएसएमई ग्रोथ फंड प्रस्तावित है, जिससे पश्चिम बंगाल के लघु और मध्यम उद्योगों को लाभ होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में 6,800 सूचीबद्ध कंपनियां बंद हो चुकी हैं और एमएसएमई क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
भूपेंद्र यादव ने जूट उद्योग पर विशेष जोर देते हुए कहा कि देश का 80 प्रतिशत जूट उत्पादन पश्चिम बंगाल में होता है, जिससे 2.5 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। बजट में जूट क्षेत्र के तकनीकी विकास पर बल दिया गया है।
महिला सशक्तिकरण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देशभर में दो करोड़ “लखपति दीदी” बनाई गई हैं। प्रत्येक जिले में छात्राओं के लिए छात्रावास स्थापित करने की योजना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल को 1.10 लाख करोड़ रुपये प्रदान किए हैं, लेकिन राज्य सरकार पर धन के दुरुपयोग के आरोप हैं। उन्होंने मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और पीएम पोषण योजना के क्रियान्वयन में अनियमितताओं का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत और पीएम-किसान जैसी योजनाओं को राज्य में पूरी तरह लागू नहीं होने दिया गया। साथ ही राज्य सरकार पर लगातार कर्ज लेने और पूंजीगत व्यय कम रखने का आरोप लगाया।
भूपेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि विज्ञान शिक्षा के लिए आवंटन कम है, जबकि मदरसों के लिए 5,713.61 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। उत्तर बंगाल की तीन करोड़ आबादी के लिए मात्र 910 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
