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"छोटा सा बदलाव ही जिंदगी की एक बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है"।

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मदरसा मीरकातुल उलूम में एक दिवसीय जलसा, चार छात्रों को हिफ़्ज़ की दस्तार

Date : 11-Feb-2026

 अररिया, 11 फरवरी।

फारबिसगंज के रामपुर उत्तर स्थित मदरसा मीरकातुल उलूम में बीती रात्रि एक दिवसीय भव्य जलसे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम इमारत-ए-शरीया पटना के नायब नाजिम मौलाना मुफ़्ती सोहराब नदवी की अध्यक्षता तथा मौलाना मुफ़्ती शाहनवाज़ मुजीबी नदवी की देखरेख में संपन्न हुआ।

जलसे में मुख्य अतिथि इमारत-ए-शरीया बिहार, ओडिशा एवं झारखंड के नायब मौलाना मोहम्मद शमशाद रहमानी शामिल हुए। विशेष अतिथियों में आजमगढ़ के हजरत मौलाना सिफात काजमी, आजमगढ़ सरायमीर के मौलाना जमाल अनवर कासमी,पूर्वी चंपारण के मौलाना मुफ्ती मेराजुद्दीन तथा अररिया के मौलाना व मुफ्ती अतारुल क़ासमी सहित कई वरिष्ठ उलेमा-ए-किराम मौजूद रहे।

कार्यक्रम में उत्तरप्रदेश से मुफ्ती अब्दुर्रशीद,मुफ्ती कमरुल जमा,मदरसा मिरकातुल उलूम के नाजिम मुफ्ती महताब,कारी नाइमुल्लाह समेत बड़ी संख्या में उलेमा,हाफिज और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शिरकत की। आयोजन समिति में मौलाना नौशाद, मोहम्मद समील्लाह, मौलाना महफूज,हाफिज नाइमुद्दीन,कारी शम्सुस जमा, मौलाना फारूक, हाफिज गयासुद्दीन,हाफिज जफर, मौलाना दिलशाद वासिल, हाफिज जमशेद, तनवीर असरी, मौलाना क़ुद्दूस और कारी मोईनुद्दीन सहित अन्य लोग शामिल रहे।

जलसे के दौरान चार छात्रों के हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन मुकम्मल होने पर दस्तारबंदी की रस्म अदा की गई।हाफिज हम्माद,हाफिज मोहम्मद अकरम,हाफिज अब्दुल माजिद और हाफिज हंजाला को मौलाना जमाल अनवर कासम के हाथों दस्तार पहनाई गई।

अपने संबोधन में नायब अमीर-ए-शरीयत मौलाना मोहम्मद शमशाद रहमानी ने कहा कि यदि लोग अल्लाह के रसूल हजरत मोहम्मद की बताई हुई बातों और उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतार लें, तो दुनिया और आख़िरत में कामयाब हो सकते हैं। उन्होंने युवाओं को नैतिकता, सच्चाई और इंसाफ़ के रास्ते पर चलने की नसीहत दी।

अध्यक्षीय भाषण में मौलाना मुफ्ती सोहराब नदवी ने कहा कि आज समाज को नशे जैसी घातक बुराइयों से बचाने की सख्त जरूरत है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को दीनी तालीम के साथ-साथ दुनियावी शिक्षा भी दिलाएं, ताकि वे एक बेहतर इंसान और ज़िम्मेदार नागरिक बन सकें। साथ ही उन्होंने दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कुरआन की शिक्षा, नैतिक प्रशिक्षण और समाज में धार्मिक ज्ञान की अहमियत पर प्रकाश डाला।


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